प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने चिरपरिचित अंदाज में अमेरिकी कांग्रेस में प्रवेश किया और सबसे हाथ मिलाते हुए मंच पर पहुंचे। मोदी का अभिवादन स्वीकारते हुए अमेरिकी कांग्रेस के सदस्यों ने भी उनका तालियों के साथ जोरदार स्वागत किया। मंच पर पहुंचते ही उन्होंने कहा कि अमेरिका वीरों का देश है। उन्होंने कहा कि ये सदन लोकतंत्र का मंदिर है जिसने दूसरे देशों में लोकतंत्र को मजबूत किया है। अमेरिकी संसद में अमेरिका के दिग्गज नेताओं के समक्ष बोलना सौभाग्य की बात है। मुझे यहां संबोधन का मौका देकर आपने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और उसकी सवा सौ करोड़ जनता का सम्मान किया है।

मोदी ने बाबा साहेब अम्बेडकर का जिक्र करते हुए कहा कि बाबा साहेब ने यहां के कोलंबिया विश्वविद्यालय में वर्षों बिताया और अपनी प्रतिभा को निखारा। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी भारत और अमेरिका को ‘स्वाभाविक सहयोगी’ सहयोगी कहा था। महात्मा गांधी के अहिंसा के संदेश ने मार्टिन लूथर किंग को प्रभावित किया। मोदी के इतना कहते ही अमेरिकी संसद ने उन्हें स्टैंडिंग ओवेशन दिया।

अमेरिकी संसद में मोदी ने कहा कि एक लोकतंत्र से दूसरे लोकतंत्र को ताकत मिलती है। अमेरिका और भारत के इतिहास अलग भले हों लेकिन हम लोकतंत्र के धागे से जुड़े हैं। मोदी ने कहा कि अमेरिका और भारत के बीच गहरा रिश्ता है। दोनों देश आजादी के बंधन से एक दूसरे से जुड़े हैं। भारत एक है और इसकी एक ही पवित्र किताब है वह है हमारा संविधान। इसके बाद उन्होंने मुंबई हमले के दौरान भारत के लिए जरूरी समय में मदद का हाथ बढ़ाने के लिए धन्यवाद दिया। मोदी ने कहा कि भारत मानवता की सेवा में इस भूमि की महिलाओं और पुरुषों के महान बलिदान की सराहना करता है।

बिना नाम लिए मोदी का पाकिस्तान पर हमला

आतंकवाद पर बोलते हुए पीएम मोदी ने नाम लिए बिना पाकिस्तान पर हमला बोला। मौजूदा हालात में विश्व में आतंकवाद सबसे बड़ा खतरा है। आतंकवाद का खात्मा हर हाल में जरूरी है। इसके लिए सभी देशों को साथ आना होगा। आतंकवाद का गढ़ भारत के पड़ोस में है। आतंकवाद को धर्म से अलग करना होगा। उन्होंने कहा कि भारत की पश्चिमी सीमा से अफ्रीका तक आंतकवाद के कई नाम हैं। आतंकवाद कहीं लश्कर तो कहीं आइएस (इस्लामिक स्टेट) के नाम से पल रहा है।

अमेरिका की संयुक्त बैठक को संबोधित करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के पांचवें प्रधानमंत्री हैं। वहीं, 2005 के बाद से वह ऐसे पहले प्रधानमंत्री होंगे, जो अमेरिका में वहां की कांग्रेस को संबोधित करेंगे। इससे पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (19 जुलाई, 2005), अटल बिहारी वाजपेयी (14 सितंबर, 2000), पीवी नरसिंह राव (18 मई, 1994) और राजीव गांधी (13 जुलाई, 1985) अमेरिकी कांग्रेस की संयुक्त बैठक को संबोधित कर चुके हैं।

भारत और अमेरिका के रिश्तों में उतार-चढ़ाव का दौर हमेशा से रहा है। लेकिन पिछले दो साल में दोनों देश एक दूसरे के काफी करीब आए हैं। राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा था कि दुनिया के दो महान लोकतांत्रिक देश एक नए इतिहास को बना सकते हैं।

वहीं पीएम मोदी ने कहा था कि बदल रहे अंतरराष्ट्रीय माहौल में अमेरिका के साथ बेहतर संबंध समय की मांग है। अपने इस अमेरिकी दौरे में पीएम मोदी एमटीसीआर और एनएसजी के मुद्दे पर कामयाबी हांसिल कर चुके हैं।

US संसद से मोदी बोले, ‘आतंकवाद का गढ़ भारत के पड़ोस में’

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