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अमेरिका ने कहा है कि भारत न्‍यूक्‍िलयर सप्‍लायर्स ग्रुप (NSG) का सदस्‍य बनने जा रहा है। उनकी यह सदस्‍यता परमाणु दौड़ के लिए नहीं, बल्कि परमाणु ऊर्जा के नागरिक उपयोग के लिए है।

स्‍टेट डिपार्टमेंट के उप प्रवक्‍ता र्मा‍क टोनेर ने शुक्रवार को अपनी डेली न्‍यूज कॉन्‍फ्रेंस में बताया कि भारत परमाणु हथियारों की दौड़ में शामिल नहीं है। वह परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण प्रयोग के लिए NSG का सदस्‍य बन रहा है। ऐसे में हमें उम्‍मीद है कि पाकिस्‍तान इस बात को समझेगा।

यह बात उन्‍होंने उस सवाल के जवाब में कही, जिसमें उनसे एनएसजी की सदस्यता के लिए भारत के आवेदन और इस पर पाकिस्तान द्वारा जताए जा रहे विरोध के बारे में पूछा गया था। गौरतलब है कि पाकिस्तान इस आधार पर भारत का विरोध कर रहा है कि भारत को इस समूह की सदस्यता मिलने से क्षेत्र में परमाणु हथियारों की दौड़ को गति मिलेगी।

हालांकि, अमेरिका 48 देशों वाले एनएसजी की अहम बैठक से पहले सब कुछ अच्छा होने की कामना कर रहा है। टोनर ने कहा, ‘देखिए, मैं बस इतना ही कह सकता हूं कि राष्ट्रपति बराक ओबामा की वर्ष 2015 में हुई भारत यात्रा के दौरान उन्होंने इस बात की पुष्टि की थी कि अमेरिका मानता है कि भारत मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था की अनिवार्यताओं को पूरा करता है और सदस्यता के लिए तैयार है।

मगर, यह एक सर्वसम्मति वाली संस्था है इसलिए हम इंतजार करेंगे और देखेंगे कि मत किस ओर जाते हैं। उन्होंने कहा कि एनएसजी में नए सदस्यों के शामिल होने की संभावनाओं पर चर्चा मौजूदा सदस्यों का आंतरिक मसला है। मुझे लगता है कि वे नियमित रूप से बैठकें करते हैं और इससे आगे मुझे कुछ नहीं कहना है।

एनएसजी की आगामी बैठक इस उद्देश्य के लिए नहीं रखी गई है। टोनर ने कहा कि यह कोई विशेष बैठक नहीं है। मेरा मानना है कि इसे प्रमुख तौर पर इस मुद्दे पर चर्चा के लिए नहीं बुलाया गया है। प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान ने अपनी दिलचस्पी को सार्वजनिक कर दिया है और कोई भी देश सदस्यता के लिए आवेदन कर सकता है।

US ने PAK से कहा, भारत की NSG सदस्यता का हथियारों से संबंध नहीं

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