पीएम नरेंद्र मोदी की कालेधन पर बयान पर शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में निशाना साधा। मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में शि‍वसेना ने प्रधानमंत्री से उनके चुनावी वादे को लेकर सवाल किए हैं। आखि‍र सरकार ने दो साल के कार्यकाल में देश के कितने लोगों के खाते में 15 लाख रुपए जमा हुए हैं।

प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ कार्यक्रम पर तंज कसते हुए शिवसेना ने लेख का शीर्षक ‘चाय से ज्यादा केतली गरम… मन की बात!’ दिया है। शिवसेना ने कालेधन को केंद्र में रखकर लिखा है कि देश बदल रहा है, लेकिन हमें मुफ्त चाय नहीं चाहिए? चुनाव से पहले जो वचन दिया था उसके अनुसार हमारे बैंक खाते में 15 लाख रुपए कब जमा करते हो, यह बताओ ? ऐसा कोई सिरफिरा चाय की चुस्की मारते हुए पूछे तो क्या किया जाए? उसे मारें, जलाएं या पकड़ें, ऐसा सवाल कुछ लोगों के मन में उठ सकता है।

शि‍वसेना ने लिखा है, ‘कालाधन उद्योगपति, फिल्मवाले और आतंकवादी संगठनों के साथ राजनीति में भी अधिक खनकता है और वही पर बूच मारने की अधि‍क जरूरत है। कालाधन ढूंढने के लिए स्विट्जरलैंड या मॉरिशस जाने की जरूरत नहीं। कालाधन हमारे घर में है, उसे खोदकर निकाले तो भी मोदी का मिशन सफल हो जाएगा।’

लेख में आगे लिखा गया है कि मोदी के ‘मन की बात’ कड़क चाय की तरह है, लेकिन मुंबई में कालेधन पर लोग ‘मन की बात’ सुने इसलिए कई स्थानों पर मुफ्त में ‘चाय-पानी’ की व्यवस्था की गई।

 

 

PM मोदी से पूछा – कितने लोगों के खाते में आए 15 लाख : शिवसेना

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