पीजीआई के एडवांस आई सेंटर में दाखिल 32 से ज्यादा मरीजों की आंखों की रोशनी खतरे में है। इन मरीजों की आंखों में 12 जुलाई को एवस्टिन इंजेक्शन दिया गया था। इससे मरीजों की आंखों में जलन, सूजन और आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा।

कुछ की आंखों में तो पानी निकलने लगा, जो बंद नहीं हुआ। पीजीआई को जब इसकी सूचना मिली तो उसने सभी मरीजों को दाखिल कर लिया है। वीरवार को एक पेशेंट की सर्जरी भी की गई, बाकी मरीजों को निगरानी में रखा गया है। डाक्टरों ने मरीजों से कहा कि दो दिन बाद ही आंखों की रोशनी की वास्तविक स्थिति के बारे में पता चल सकेगा। फिलहाल पीजीआई ने इस मामले में चुप्पी साध रखी है। ये सभी मरीज पंजाब व हरियाणा के अलग-अलग जिलों से आए थे।

एडवांस आई सेंटर के एक डाक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि संबंधित बैच की दवा में कोई गड़बड़ी हो सकती है। इसकी जांच करना ड्रग कंट्रोलर का काम है। पीजीआई की ओर से पूरी सावधानी बरती गई थी। इसलिए इस संबंध में वह कुछ ज्यादा नहीं बता सकते।

मंगलवार को सभी मरीजों को इंजेक्शन देकर घर भेज दिया गया था। शाम तक मरीजों की शिकायतों के फोन आने लगे। किसी की आंख में जलन तो किसी की आंख से पानी बह रहा था। इसके बाद पीजीआई प्रशासन सकते में आ गया। डाक्टरों ने उन सभी मरीजों की लिस्ट जिन्हें एवस्टिन के उस बैच के इंजेक्शन दिए गए थे, बुधवार को उनको बुलाकर पीजीआई में दाखिल कर लिया गया।

पीजीआई के डाक्टरों के अनुसार यह एक विशेष इंजेक्शन है, जो 25 हजार रुपये में मुहैया कराया जाता है। एक मरीज को चार सप्ताह बाद इंजेक्शन देना होता है। तीन से चार इंजेक्शन लगते हैं। इतने महंगे इंजेक्शन का खर्च हर मरीज नहीं उठा पाता है।

ऐसे में मरीज आपस में शेयर करते हैं, तब इसकी लागत 1500 रुपये प्रति मरीज आती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि एवस्टिन इंजेक्शन पीजीआई ने उपलब्ध कराया है या फिर पेशेंट खुद खरीदकर लाए थे?

पंचकूला से आए दीपांशु गंभीर ने बताया कि उसके मामा को मंगलवार को इंजेक्शन लगाया गया था। उसके बाद उनकी आंखों से लगातार पानी बहने लगा और आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा। वे पीजीआई जाने के लिए विचार बना रहे थे कि डाक्टरों का फोन आ गया कि वे पीजीआई आ जाएं। उनकी आंखों में गलत इंजेक्शन लग गया है। फिलहाल उनके मामा अभी पीजीआई में एडमिट हैं। शुक्रवार शाम तक आंखों की रोशनी के बारे में सही स्थिति पता चल पाएगी।

एवस्टिन स्लोविजन लॉस में दी जाने वाली दवा बेवासिजुमेब का ब्रांड नाम है। यह उम्रदराज लोगों की आंखों में होने वाली ब्लड वेसल की असामान्य ग्रोथ को नियंत्रित करती है। यह दवा कई तरह के कैंसर के उपचार में कारगर है। अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने इसे 2004 में मंजूरी दी थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने एवस्टिन को आवश्यक दवाओं की सूची में रखा है।

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PGI के डॉक्टरों ने 32 मरीजों को लगाया गलत इंजेक्शन

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