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आम आदमी पार्टी (आप) के 21 विधायकों के संसदीय सचिव के पदों पर रहने के चलते उन्हें अयोग्य करार दिए जाने की मांग करने वाली याचिका पर सोमवार को दोपहर 3 बजे चुनाव आयोग में सुनवाई होगी। पिछली सुनवाई के दौरान 14 आप विधायकों ने अपना पक्ष चुनाव आयोग के सामने रखा था। सोमवार को होने वाली सुनवाई के दौरान बाकी विधायक भी अपना पक्ष चुनाव आयोग के सामने रखेंगे।

पिछली सुनवाई के दौरान कुछ विधायकों ने उन्हें सरकारी वकील की मदद मुहैया कराने की मांग की थी, लेकिन चुनाव आयोग ने उस मांग को ठुकरा दिया था। सभी विधायकों का पक्ष सुनने का बाद चुनाव आयोग इस मामले में एक बार फिर से शिकायतकर्ता को अपनी बात रखने का मौका दे सकता है।

यहां पर बता दें कि दिल्ली सरकार की ओर से पहले ही इस मामले में सफाई रखी जा चुकी है। सरकार का कहना है कि इन विधायकों को संसदीय सचिव पद पर नियुक्त करते समय उनकी नियुक्ति की अधिसूचना में ही यह साफ कर दिया गया था कि यह लाभ का पद नहीं है और इस पर उन्हें संबंधित मंत्रालय के कार्यालय में स्थान और सरकारी काम के लिए परिवहन सुविधा के अलावा कोई सुविधा नहीं मिलेगी। मगर आयोग इस जवाब से संतुष्ट नहीं है। ऐसे में मामले की सुनवाई आयोग ने 29 अगस्त तक के लिए टाल दी थी।

सुनवाई के बाद आप विधायक मदन लाल ने बताया कि उनके अलावा नितिन त्यागी, राजेश गुप्ता और दोनों जरनैल सिंह ने आयोग से वकील के लिए अनुरोध किया। हालांकि इस मांग को सिर्फ सुनवाई टालने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

इस मामले में आयोग का रुख देखते हुए इन विधायकों की सदस्यता जाना लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि 70 सदस्यों वाली दिल्ली विधानसभा में पार्टी के पास 67 विधायक हैं, इसलिए 21 की सदस्यता जाने से भी राज्य की अरविंद केजरीवाल सरकार को तत्काल कोई खतरा नहीं होगा।

 

AAP के 21 विधायकों पर लटकी सदस्यता रद्द होने की तलवार, EC करेगा सुनवाई

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