962 के भारत-चीन युद्ध के कुछ महीनों बाद बॉर्डर पोस्ट से भटक कर भारत आया चीनी सैनिक 54 साल बाद शनिवार को बीजिंग पहुंचा। वांग की (77) के साथ उसकी भारतीय फैमिली भी थी। 6 साल जेल में काटने के बाद वांग मप्र के बालाघाट में बस गया था, वहीं उसने अपना घर बसाया। अब दोनों देशों की सरकारों की मदद से वह अपने देश चीन लौट गया। बीजिंग एयरपोर्ट पर चीनी परिजनों के साथ वांग की मुलाकात से माहौल काफी भावुक हो गया।- न्यूज एजेंसी के मुताबिक, वांग दिल्ली-बीजिंग फ्लाइट से वहां बीजिंग पहुंचा। उसके साथ उसका बेटा विष्णु (35), बहू नेहा और पोती खनक वांग भी थे। हालांकि उसकी पत्नी सुशीला भारत में रूक गई है।
वांग को बीजिंग में चीन के विदेश मंत्रालय, इंडियन एंबेसी के ऑफिशियल्स और चीन में रहने वाले उसके करीबी रिश्तेदारों ने रिसीव किया।
5 दशक बाद पहली बार अपने रिश्तेदारों से गले मिलकर वांग भावुक हो गया।
एयरपोर्ट पर मौजूद एक ऑफिशियल ने कहा, “इस मिलन से माहौल काफी भावुक हो गया।”

1963 में भटककर पहुंचा था असम
वांग के बेटे विष्णु ने बताया कि 1 जनवरी 1963 को उसके पिता रात के समय भटककर असम पहुंच गए थे।
जहां भारतीय सेना ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उन्हें असम, अजमेर और दिल्ली की जेलों में 6 साल तक रहना पड़ा। मार्च 1969 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने वांग की रिहाई का आदेश दिया।जेल से छूटने के बाद वांग मध्यप्रदेश के बालाघाट जिला स्थित तिरोदी गांव में बस गया।हालांकि वांग की मुश्किलें कम नहीं हुईं। भारत सरकार ने उसे मिलने वाली 100 रुपए की पेंशन बंद कर दी।
वांग ने एक फैक्ट्री में चौकीदार की नौकरी कर ली। नेपाली जैसा दिखने के कारण उसे राजबहादुर नाम मिल गया। यहीं पर उसकी शादी सुशीला से हुई।विष्णु ने बताया कि इजाजत नहीं मिलने के कारण वांग 2006 में अपनी मांग की मौत के बाद भी घर नहीं जा पाया।
हालांकि भारतीय मीडिया में उसकी कहानी कई बार पब्लिश हो चुकी है, लेकिन उसके दुख की झलक पेश करने वाले बीबीसी के हालिया टीवी फीचर को चीनी सोशल मीडिया में बड़े पैमाने पर जगह मिली और उस पर चर्चा शुरू हो गई।
इसके बाद चीनी सरकार ने भारत के साथ मिलकर उसकी वापसी की कोशिशें शुरू की।चीन के विदेश मंत्रालय ने 6 फरवरी को बताया था कि वांग को 2013 में चीन जाने के लिए पासपोर्ट प्रोवाइड कराया गया था। वांग ने लिविंग अलाउंस का भुगतान भी किया था।
बहरहाल, बाद में चीन सरकार ने वांग और उसकी फैमिली को चीन विजिट के लिए वीजा प्रोवाइड करा दिया।
भारत सरकार ने भी वांग को रि-एंट्री का वीजा दिया है ताकि वह अपनी मर्जी के मुताबिक भारत आ सके।

 

54 साल बाद देश लौट गया चीनी सैनिक

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