आदर्श आचार संहिता लागू होते ही सियासी दलों ने चुनावी दंगल में उतरने को ताकत झोंक दी। बसपा सहित क्षेत्रीय दल जहां अपने प्रत्याशियों की सूची जारी कर चुके हैं वहीं कांग्रेस और भाजपा में अभी टिकटों पर मंथन चल रहा है। दोनों राष्ट्रीय दलों ने अभी तक घोषणा पत्र जारी नहीं किया है, लेकिन रैलियों और जनसभाओं में उठाए मुद्दों से दोनों का चुनावी एजेंडा तय कर चुके हैं।

भाजपा ने कांग्रेस को घेरने के लिए स्टिंग प्रकरण को हथियार बना लिया है जबकि केंद्र सरकार के सुशासन को अपना चुनावी मंत्र घोषित किया है। उधर, भाजपा को घेरने के लिए कांग्रेस नोटबंदी जैसे ‘मोदी मंत्र’ और केंद्रीय नीतियों पर निशाना साध रहीं है। स्टिंग कांड की काट कांग्रेस 18 मार्च को राष्ट्रपति शासन लगाने के फैसले से करेगी। स्थानीय मुद्दों में राजधानी गैरसैंण, नए जिलों का गठन, पलायन और पुनर्वास दोनों ओर से छाया रहेगा।

भाजपा और कांग्रेस में आचार संहिता लागू होते ही टिकटों के लिए दौड़भाग तेज हो गई है। एक दूसरे के प्रत्याशियों पर स्थिति साफ होने का इंतजार कर रहे दलों पर अब जल्द प्रत्याशी तय करने का दबाव है। 70 विधानसभाओं के लिए प्रत्याशियों के चयन में जुटी पार्टियां 10 जनवरी के बाद पहली सूची जारी कर देंगी। इसी के साथ दोनों दलों का घोषणा पत्र भी जनवरी के दूसरे सप्ताह में ही जारी हो पाएगा।

 

उत्तराखंड में सत्ता पाने के लिए भाजपा के पास है ये चुनावी हथियार

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