साल 2002 में अहमदाबाद में हुए दंगों के एक मामले में गुजरात हाई कोर्ट ने मंगलवार को निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए नौ लोगों को हत्या का दोषी करार दिया। दंगे में तीन लोगों की मौत हो गई थी।

निचली अदालत ने 2011 में दिए फैसले में दस में सिर्फ दो को ही हत्या का दोषी करार दिया था। एक आरोपी को बरी कर दिया था, जबकि सात अन्य को मामूली आरोपों के तहत सजा सुनाई थी।

उच्च न्यायालय ने दंगों के चश्मदीद गवाह मुहम्मद भट्टी की याचिका पर सुनवाई के दौरान पुलिस अधीक्षक (अहमदाबाद ग्रामीण) संदीप सिंह को जांच सौंपी। एसपी की रिपोर्ट के बाद न्यायमूर्ति हर्ष देवानी व बीरेन वैष्णव की पीठ ने मामले में सात और आरोपियों को हत्या का दोषी माना है। नौ लोगों को आइपीसी की धारा 302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास), 323 (चोट पहुंचाना), 324, 325 व 326 के तहत दोषी करार दिया गया है। एक आरोपी बरी कर दिया गया।

मालूम हो, 27 फरवरी, 2002 को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस में 58 कारसेवकों को जिंदा जलाने के अगले दिन 28 फरवरी को सूबे भर में दंगे भड़क उठे थे। अहमदाबाद के वीरमगाम कस्बे में हथियारों से लैस 40 लोगों की भीड़ ने मुस्लिम बस्ती पर हमला कर दिया था, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी।

 

2002 अहमदाबाद दंगा मामले में नौ लोग हत्या के दोषी करार

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