अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के गोपनीय दस्तावेजों में कहा गया है कि वर्ष 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद पाक के परमाणु संयंत्र पर भारतीय वायुसेना बड़ा हमला कर सकती थी, जिससे पाकिस्तान को भारी क्षति होती। इस हमले के बाद पड़ोसी देश के परमाणु प्रोजेक्ट कई साल पीछे खिसक जाते। सीआईए द्वारा जारी कुछ दस्तावेजों में इस बात का खुलासा हुआ है कि भारतीय वायुसेना का यह हमला इंदिरा गांधी की हत्या के बाद नवंबर 1984 में किया जा सकता था। दस्तावेजों के मुताबिक यदि भारत इस हमले को अंजाम दे देता तो पाकिस्तान के परमाणु संयंत्र को इतनी जबरदस्त क्षति होती कि इस्लामाबाद कई साल तक परमाणु हथियारों के उत्पादन की सोच भी नहीं पाता। उस वक्त ‘पाकिस्तान की कमांड, कंट्रोल और संचार काफी खराब हालत में था जिसकी वजह से वह भारत के हमले का न तो जवाब दे पाता और न ही उसे रोक पाता।’

 

दस्तावेजों के मुताबिक पाकिस्तान 1984 तक अपनी एयरफोर्स को ठीक सुविधाएं देने में सक्षम नहीं था। हालांकि कागजातों में इस बात की पुष्टि नहीं की गई है कि हमले के लिए भारत किन जहाजों का इस्तेमाल करता, लेकिन माना जा रहा है कि भारत मिग-23 या जगुआर एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल कर सकता था। अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने अपने हजारों गोपनीय दस्तावेजों का खुलासा किया है, जिनमें से एक में भारत-पाक संबंधों का जिक्र है।

1984 में ही पाक न्यूक्लियर प्लांट पर हमला कर सकती थी भारतीय वायुसेना

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