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नई दिल्ली। विदेश सचिव एस जयशंकर ने मंगलवार को कहा कि भारतीय सेना की ओर से पहले नियंत्रण रेखा के पार लक्षित हमले किए गए हैं या नहीं, इस बारे में सिर्फ सेना जानती है और ऐसे हमलों के बारे में कोई ‘संदेश’ नहीं दिया गया।

सूत्रों ने कहा, ‘विदेश सचिव ने कहा कि अहम मुद्दा यह है कि हमने लक्षित हमले करने के बाद सार्वजनिक तौर पर इसकी जानकारी दी जिससे एक राजनीतिक-सैन्य संदेश गया। पहले सीमा पार की गई कि नहीं, इसके बारे में सिर्फ सेना जानती है। लेकिन यह अप्रासंगिक है, क्योंकि कोई संदेश ही नहीं दिया गया।’

विदेश मामलों से जुड़ी संसदीय समिति में हुए वाकयों के बारे में स्पष्टीकरण तब दिया गया जब कुछ विपक्षी सांसदों ने विदेश सचिव के हवाले से कहा कि सेना ने ‘नियंत्रण रेखा के पार पहले भी विशिष्ट लक्ष्य पर, सीमित-क्षमता के आतंकवाद निरोधक अभियानों’ को अंजाम दिया है, लेकिन पहली बार सरकार ने इसके बारे में सार्वजनिक तौर पर जानकारी दी।

मंगलवार को कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति की बैठक में विदेश सचिव एस. जयशंकर के अलावा उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत, रक्षा सचिव जी. मोहन कुमार और बीएसएफ के डीजी केके शर्मा शामिल हुए। बैठक के बाद पहले जो खबर निकली वह विवादित हो गई।

पहले विदेश सचिव के हवाले से कहा गया कि सरकार ने पूर्व में भी हुई सर्जिकल स्ट्राइक की बात मान ली है। जयशंकर ने अपने बारे में भ्रामक तथ्यों की जानकारी होते ही तत्काल इसका खंडन कर दिया। उन्होंने कहा- ऐसी कार्रवाई सेना करती है, इसलिए वही इस पर बोल सकती है। मैंने सिर्फ कार्रवाई की बात सार्वजनिक करने की जानकारी दी।

करीब ढाई घंटे तक चली संसदीय समिति की बैठक में उप सेना प्रमुख ले. जन. बिपिन रावत ने भी नियंत्रण रेखा पार कर आतंकी लांच पैड पर हुई सर्जिकल स्ट्राइक का ब्योरा दिया। आतंकियों को हुए नुकसान के बारे पूछे जाने पर कहा कि सेना सर्जिकल स्ट्राइक के लिए गई थी न कि सुबूत इकट्ठा करने।

सरकार के प्रतिनिधियों ने समिति को बताया कि स्ट्राइक का उद्देश्य पूरा हो गया है, लेकिन पाकिस्तान को आशंका है कि भारत भविष्य में ऐसे ही स्ट्राइक करेगा। बैठक में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी मौजूद थे लेकिन उन्होंने कोई सवाल नहीं पूछा।

विदेश सचिव एस जयशंकर ने बताया कि 29 सितंबर के सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भविष्य में पाकिस्तान के साथ बातचीत का कैलेंडर अभी तैयार नहीं हुआ है। अभियान के तुरंत बाद पाकिस्तान के सैन्य संचालन महानिदेशक को इस बारे में सूचना दी गई थी।

गौरतलब है कि रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर ने संप्रग सरकार के कार्यकाल में सर्जिकल स्ट्राइक के कांग्रेस के दावे को खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा था कि उड़ी आतंकी हमले के बाद पहली बार सर्जिकल स्ट्राइक की गई। उनका कहना था कि पूर्व में कमांडरों ने स्थानीय स्तर पर अभियान किए। इनमें सरकार शामिल नहीं थी।

 

 

 

सेना ही बता सकती है,सर्जिकल स्ट्राइक पहले हुए या नहीं :एस. जयशंकर

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