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 लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार कीहौसला पोषण योजनाने जातिवाद की पोल खोल दी है। प्रशासन से जुड़े सूत्रों की मानें तो सूबे के कई इलाकों में गर्भवती महिलाओं ने इसलिए खाना खाने से इनकार कर रही हैं क्योंकि वह दलित महिलाओं द्वारा तैयार किया गया था। यह योजना 20 जून को शुरू की गई थी और इसे चार चरणों के अन्तर्गत पूरे राज्य में लागू किया जाना था। इस योजना के अन्तर्गत गर्भवती महिलाओं और कुपोषित बच्चों को आंगनवाड़ी में पोषणयुक्त भोजन और फल उपलब्ध कराया जाता है। इस मामले पर वरिष्ठ पत्रकार अरविंद शेष ने लिखा है…..

वे मंदबुद्धि या शारीरिकमानसिक रूप विकलांग, कुपोषित बच्चे पैदा कर लेंगी, खुद कुपोषित होकर या भूख से मर जाएंगी, लेकिन सरकारीहौसला पोषण योजनाके तहत मुहैया कराए गए खानेपीने की चीजें नहीं खाएंगी!

वजहः वेऊंचकही जाने वाली जात की हैं और खानेपीने की चीजें बनाने वाली महिलाओं की जातनीचकही जाती है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने यह योजना लागू की है, ताकि गर्भवती महिलाओं और कुपोषित बच्चों को पोषणयुक्त खाना मुहैया कराया जा सके। लेकिन पीलीभीत के धनकुना गांव की तमामऊंचजात की महिलाओं ने दलित यानीनीचकही जाने वाली महिलाओं के हाथों बनाए गए खाने का बहिष्कार कर दिया।

इसी तरह एक स्कूल केऊंचजात के बच्चों तक ने दलित महिला के बनाए खाने को खाने से इनकार कर दिया। ऐसे मामले आम हैं। और आप कहते हैं कि हिंदू समाज एक समरस समाज है और समाज की समरसता बनाए रखने के लिए इन शर्मनाक वीभत्सताओं पर सवाल नहीं उठाया जाए। इस समरसता मेंसमकारसविषम का जहर बन कर क्यों पसर रहा है?

यह है ब्राह्मण धर्म यानी हिंदू धर्म, जो अपने अमानवीय कुकर्मों को धर्म कहता है और अपने ही बीच के लोगों में गिन कर उनकी यहनीचहैसियत तय करता है! दलित या येनीचजातियां मरी गायों या जानवरों की खाल उतार कर गुजारा करेंगी तो उनको मार डालेंगे, नहीं उतारेंगे तो उनको मार डालेंगेयह धंधा छोड़ कर किसी आंगनवाड़ी में खाना बनाने का काम करेंगी या कोई और रोजगार करेंगी तो उनको मार डालेंगे…! क्या करें ये…?

अपने धर्म में तो सिर्फ मार डाले जाने या मरते हुए जीने की हैसियत बख्शी ही है, अब संविधान से बराबरी और सम्मान के अधिकार की भी हत्या कर दो…! लेकिन याद रखो, अभी तो गुजरात में सिर्फ तूफान की सुगबुगाहट है, ऐसा करते रहे तो यह तूफान पंडावाद के तमाम किलों और गढ़ों को धूल करके उस पर एक नई दुनिया खड़ी करेगा, जिस पर इंसान रहेंगे, तुम्हारी तरह केऊंचजात की कुंठा और कुकर्म में मरतेलिथड़ते हुए अविकसित दिमाग के अमनुष्य नहीं..!

5 अगस्त से 15 अगस्तअहमदाबाद से ऊना यात्रादेश की आजादी के दिन आजादी की घोषणा का दिन पंद्रह अगस्तइन्हीं तमाम ब्राह्मणवादी बर्बरताओं से…!

वे मंदबुद्धि बच्चे पैदा कर लेंगी लेकिन दलितों के हाथ का खाना नहीं खाएंगी

| उत्तर प्रदेश, लखनऊ | 0 Comments
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