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राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 2 पर दिल्ली से आगरा तक के हिस्से को छह लेन बनाने की परियोजना पूरा होने में अभी कुछ साल और लगेंगे क्योंकि अभी करीब 50 फीसदी काम ही पूरा हो पाया है। इसके स्वतंत्र इंजीनियर ने तो काम की बेहद सुस्त गति पर टिप्पणी भी की है। हालांकि 1,928 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना पर काम 2012 में ही शुरू हो गया और इसे अप्रैल 2015 में पूरा हो जाना था।

रोड बने ना बने, लेकिन इस पर मोटर वाहनों से टोल की वसूली चालू है। इस परियोजना को देखने वाली केन्द्रीय एजेंसी, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के आधिकारिक सूत्रों से मिली सूचना के मुताबिक इस परियोजना की कई बार उच्चस्तरीय समीक्षा हो चुकी है, जिसमें कंशेसनायर को कड़ी चेतावनी तक दी गई है। लेकिन अभी भी परियोजना का करीब आधा काम ही पूरा हो पाया है। परियोजना के लिए बनने वाले सर्विस रोड की प्रगति का भी यही हाल है।

उल्लेखनीय है कि इस परियोजना के लिए मई 2010 में ही रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर को चुना गया था। रिलायंस इंफ्रा ने इसके लिए एक स्पेशल परपज व्हीकल (एसपीवी) के रूप में दिल्ली-आगरा टोल रोड प्राइवेट लिमिटेड का गठन किया है जो कि इसका काम देख रही है। इसने कुछ आरंभिक तैयारी पूरी होने के बाद अक्तूबर 2012 से परियोजना पर काम शुरू कर दिया और उसी समय से उस मार्ग पर गुजरने वाले वाहनों से टोल की वसूली भी शुरू कर दी गई। लेकिन अभी तक परियोजना पूरी नहीं हुई है। हालांकि परियोजना के लिए हुए करार के मुताबिक अप्रैल 2015 तक काम पूरा हो जाना था।

इस परियोजना के लिए नियुक्त स्वतंत्र इंजीनियर मेसर्स यूआरएस स्कॉट विल्सन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा 25 मई 2016 को सौंपी गई रिपोर्ट में बताया गया है कि परियोजना पर बेहद सुस्त गति से काम चल रहा है और अभी तक महज 52 फीसदी काम ही हो पाया है। सुस्ती का आलम यह है कि इस परियोजना से जुड़ी सुविधाओं (प्रोजेक्ट फेसिलिटी) पर अभी तक काम भी शुरू नहीं हो पाया है। इस परियोजना में कुल 14 छोटे पुलों को चौड़ा करना है लेकिन अभी तक इनमें से 4 पुलों पर काम भी शुरू नहीं हो पाया है।

इस सड़क पर पहले से बने 8 रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) को भी चौड़ा करने की दिशा में कोई ठोस काम नहीं हो पाया है। इस परियोजना को पूरा नहीं करने के बारे में एक जन हित याचिका दिल्ली उच्च न्यायलय में दाखिल की जा चुकी है। उच्च न्यायालय ने इस पर सुनवाई करते हुए काम में देरी पर एनएचएआई से विस्तृत जवाब मांगा गया है।

| उत्तर प्रदेश | 0 Comments
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