नई दिल्ली । “उच्च शिक्षा व कौशल गारंटी स्कीम” के तहत आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को 10 लाख रुपए तक का शिक्षा ऋण दिलाने में दिल्ली सरकार ने सहयोग के लिए विज्ञापन पर 30 लाख रुपए खर्च कर डाले। इसके बदले सिर्फ 3.15 लाख रुपए ही ऋण दिलाया जा सका।

यह आरोप स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने लगाए हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने जून 2015 में इस स्कीम के तहत शिक्षा ऋण लेने वाले दिल्ली के छात्रों का जमानती बनने का फैसला लिया था।

योजना के तहत 30 दिसंबर 2016 तक कुल 405 आवेदन आए जिनमें 97 छात्र ऋण के योग्य मिले, लेकिन 94 छात्रों को केंद्र सरकार की मदद से ऋण मिला और दिल्ली सरकार ने सिर्फ तीन छात्रों को 3.15 लाख रुपए तक का ऋण दिलाने में मदद की।

यादव ने कहा कि इस योजना के बारे में प्रचार प्रसार में दिल्ली सरकार ने 30 लाख रुपए विज्ञापन पर खर्च कर दिए जो इस वित्तीय वर्ष में और बढ़ने की संभावना है। स्वराज इंडिया ने दिल्ली सरकार से सीधा सवाल किया है कि पूरी दिल्ली में कुल 3.15 लाख रुपए का ऋण देने के लिए आम आदमी पार्टी की सरकार ने 30 लाख रुपए का प्रचार क्यों किया।

10 लाख का शिक्षा ऋण के लिए विज्ञापन पर 30 लाख खर्च कर डाले

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