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भोपाल। छठवें वेतनमान के गणना पत्रक की समीक्षा कर चुके अध्यापकों ने आठ विसंगतियां गिनाई हैं। इसमें सबसे बड़ी विसंगति क्रमोन्नति व पदोन्नति प्राप्त अध्यापकों के वेतनमान में सामने आई है। वेतन की नए सिरे से गणना होने पर उनका वेतन दो से चार हजार रुपए महीना कम हो जाएगा। प्रदेश में ऐसे 1.26 लाख अध्यापक हैं।

राज्य सरकार ने शनिवार शाम संशोधित गणना पत्रक जारी किया है। सोशल मीडिया पर वायरल होते ही गणना पत्रक की समीक्षा शुरू हो गई। रविवार सुबह से गणना पत्रक की विसंगतियों पर बहस छिड़ी हुई है। इसे लेकर अध्यापक सरकार से नाराज भी हैं। उनका कहना है कि 10 माह टहलाने के बाद भी सरकार ने हक पूरा नहीं दिया। अध्यापक संघ के पदाधिकारियों के मुताबिक मई 2016 में जारी किए गए गणना पत्रक में आठ विसंगतियां थीं।

इसके विरोध के चलते गणना पत्रक निरस्त किया गया था। सरकार ने उनमें से सिर्फ दो विसंगतियां (सहायक अध्यापक और वरिष्ठ अध्यापक के वेतनमान) दूर की हैं, लेकिन शेष पर ध्यान नहीं दिया। इतना ही नहीं, दो नई विसंगतियां और खड़ी कर दीं। अध्यापकों ने इसे लेकर आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया है।

अध्यापक नेताओं के मुताबिक वर्ष 1998 में 80 हजार श्ािक्षाकर्मी, 2001 में 18 हजार और 2003 में 28 हजार संविदा शिक्षकों की भर्ती हुई थी। अध्यापक संवर्ग में शामिल हो चुके इन 1.26 लाख अध्यापकों को एक-एक क्रमोन्न्ति और पदोन्न्ति मिल चुकी है। संशोधित गणना पत्रक में इनके वेतनमान को लेकर अलग से टेबल नहीं बनाई गई है, जिससे इनका मूलवेतन तय नहीं हो सकेगा।

अब गणना पत्रक के परिशिष्ठ-एक में दर्शाई तालिका बचती है। इससे निर्धारण करने पर इनका वेतन दो से चार हजार रुपए कम हो जाएगा। अध्यापक 4 सितंबर 2013 से इनके लिए अलग से तालिका बनाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने अब तक यह तैयार नहीं की है।

1.26 लाख अध्यापकों का कम हो जाएगा वेतन

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