hazi-ali-dargah_27_08_2016

मुंबई। मुंबई हाईकोर्ट ने मशहूर हाजी अली दरगाह में महिलाओं को जाने की इजाजत दे दी है। मगर, बावजूद इसके मुस्लिम महिलाएं अब भी दरगाह में मजार वाले हिस्से तक नहीं जाना चाहती हैं। इसके पीछे को दबाव नहीं, बल्कि धार्मिक कारण हैं।

गौरतलब है कि साल 2011 तक सभी महिलाओं को दरगाह के अंदर जाने की अनुमति थी, लेकिन साल 2012 में इस पर रोक लगा दी गई थी। इसके बाद इस मामले को लेकर कोर्ट में केस किया गया। सुनवाई के बाद मुंबई हाईकोर्ट ने हाजी अली दरगाह में महिलाओं की इजाजत 26 अगस्त को दी।

मगर, अब भी कई महिलाएं दरगाह में मजार के हिस्‍से तक नहीं जाना चाहती हैं। दरअसल, मुस्लिम महिलाओं का कहना है कि धार्मिक कारण के चलते कोर्ट को भी इस मामले में दखल नहीं देना चाहिए। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्स्प्रेस ने फैसले के आने के बाद दरगाह में महिलाओं से इस बारे में बात की। मध्यप्रदेश से वहां पहुंची शबाना कादरी के हवाले से अखबार ने लिखा कि महिलाओं को अंदर नहीं जाने दिया जाना चाहिए। हमारी पवित्र किताबों में ऐसा करने से मना किया गया है। यह एक दिव्य संदेश है। इसके साथ खेल नहीं होना चाहिए।

मुंबई के माहिम में रहने वाली 50 वर्षीय राहत ने बताया कि वह महीने में कम से कम एक बार दरगाह जरूर जाती हैं। शरिया में जैसे महिलाओं को कब्रिस्तान के अंदर न जाने के लिए कहा गया है। वैसे ही यहां आने के लिए भी मनाही है। मैं नहीं जानती कि महिलाओं को अंदर जाने की इजाजत क्यों दी जा रही है।

वहां मौजूद कई महिलाओं ने भी हाईकोर्ट के फैसले की आलोचना करते हुए इस फैसले को गलत बताया। हालांकि, हाजी अली दरगाह प्रशासन का कहना है कि इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। ऐसे में छह सप्‍ताह तक इस आदेश पर कार्रवाई नहीं हो पाएगी।

हाजी अली दरगाह में क्‍यों नहीं जाना चाहती मुस्लिम महिलाएं

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