प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को श्री वेंकेटेश्वर विश्वविद्यालय में पांच दिवसीय सालाना भारतीय विज्ञान कांग्रेस का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्‍होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार हर तरह के विज्ञान को सपोर्ट करने के लिए प्रतिबद्ध है फिर चाहे वो आधारभूत विज्ञान से अप्‍लाइड साइंस तक कुछ भी हो।

मोदी ने कहा कि हमारे वैज्ञानिकों ने देश के सामरिक दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और वे वैज्ञानिकों का हमेशा ध्यान रखेंगे तथा विकास को जारी रखने के लिए हमेशा तैयार रहेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार सभी तरह के विज्ञान में सहायता करने के लिए प्रतिबद्ध है। पीएम ने कहा कि तकनीक के क्षेत्र में 2030 तक भारत टॉप 3 देशों में होगा शामिल होगा।

इस अवसर पर पीएम तकनीकी संस्थानों के सुदृढीकरण पर जोर देते हुए कहा कि स्कूल और कॉलेजों में अच्छी प्रयोगशाला की सुविधा होनी चाहिए जिससे कि बच्चे भी विज्ञान में बेहतर योगदान दे सकें और देश के विकास में सहयोग कर सकें। पीएम ने गांव में जैविक माध्यम से बिजली और खाद बनाने पर जोर दिया।

किसानों के लिए विज्ञान की जरूरत पर बल देते हुए पीएम ने कहा कि अटल इनोवेशन मिशन प्रोग्राम के माध्यम से वैज्ञानिक गतिविधियों को बढ़ाया जाएगा। पीएम ने सतत विकास के लिए प्लास्टिक वेस्ट और इलेक्ट्रिकल वेस्ट के इस्तेमाल पर जोर देने का आग्रह किया।

इस कार्यक्रम के बाद दोपहर में प्रधानमंत्री तिरूमाला पहाड़ी पर भगवान वेंकेटेश्वर मंदिर में पूजा अर्चना करेंगे। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह दूसरा मौका होगा जब मोदी इस मंदिर में आएंगे। इसके पहले वह पिछले साल 22 अक्तूबर को मंदिर आए थे।

तिरूपति में हो रही भारतीय विज्ञान कांग्रेस का विषय ‘राष्ट्रीय विकास के वास्ते विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी’ है। विज्ञान कांग्रेस का मुख्य स्थल विश्वविद्यालय में श्रीनिवास सभागार है जहां प्रधानमंत्री नोबेल शांति पुरस्कार विजेताओं समेत मशहूर वैज्ञानिकों की सभा को संबोधित कर रहे थे।

देशभर के 14,000 वैज्ञानिकों और विद्वानों के अलावा अमेरिका, जापान, इस्राइल, फ्रांस और बांग्लादेश जैसे विभिन्न देशों के छह नोबेल पुरस्कार विजेता भी इसमें हिस्सा लेंगे। नोबेल पुरस्कार विजेताओं को प्रधानमंत्री द्वारा स्वर्ण पदक प्रदान कर सम्मानित भी किया जाएगा।

उद्घाटन भाषण के बाद मोदी विश्वविद्यलाय में चाय कार्यक्रम में नोबेल पुरस्कार विजेताओं, मशहूर भारतीय वैज्ञानिकों, गणमान्य अतिथियों एवं शीर्ष अधिकारियों समेत 50 लोगों के साथ संक्षिप्त संवाद भी करेंगे। तिरूपति दूसरी बार भारतीय विज्ञान कांग्रेस की मेजबारी कर रहा है। पहली बार 1983 में यहां 70 भारतीय विज्ञान कांग्रेस हुई थी। इस साल यह 104 वीं भारतीय विज्ञान कांग्रेस है।

हम हर तरह के विज्ञान को समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध: मोदी

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