बच्चों को शिक्षा से जोड़ने की जब भी बात होती है तो समाज के प्रभावशाली और आर्थिक रूप से संपन्न् लोग केवल बड़ी-बड़ी बातें करते हैंं। वे मदद के लिए खुद कभी आगे नहीं आते। लेकिन एक अनपढ़ आदिवासी महिला ने ऐसे लोगों को आईना दिखाने का काम किया है।
इस महिला ने अपने गांव के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए अपना घर स्कूल के लिए तब तक के लिए दे दिया, जब तक की स्कूल की बिल्डिंग नहीं बन जाती। इतना ही नहीं स्कूल के लिए भवन देने वाली महिला खुद एक झोपड़ी में रह रही है। शिक्षा विभाग के अधिकारी भी मानते हैं कि प्रचार प्रसार से दूर खमोशी से इतनी बड़ी मिसाल कायम करने वाली विस्थापित ग्राम कूकरा की महिला पंच राममुनिया बाई शिक्षा के प्रेरक की सही मायने में असली ब्रांड एंबेसेडर हैं।

स्कूल के लिए दे दिया मकान, झोपड़ी में रह रही महिला

| उत्तर प्रदेश | 0 Comments
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