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पटना। जहानाबाद के बहुचर्चित सेनारी नरसंहार मामले में कोर्ट ने गुरुवार को पंद्रह अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए 23 अन्य अभियुक्तों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय रंजीत कुमार सिह ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन कई अभियुक्तों के खिलाफ साक्ष्य प्रस्तुत करने में नाकाम रहा। दोषी करार लोगों की सजा के बारे में फैसला 15 नवंबर को होगा।

न्यायालय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अभियुक्तों में गौरी मांझी, व्यास यादव तथा दुखन मांझी को छोड़ शेष सभी अभियुक्त अदालत में उपस्थित थे। इनमें दुखन मांझी को रिहा कर दिया गया। विदित हो कि करीब 17 साल पहले 18 मार्च 1999 की देर शाम करीब साढ़े सात बजे प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के हथियारबंद दस्ते ने सेनारी गांव में एक जाति विशेष के 34 लोगों की गला रेतकर हत्या कर दी थी।

सेनारी में उस शाम नक्सली जाति विशेष के लोगों को घरों से उत्तर सामुदायिक भवन के पास बधार में ले गए थे। वहां उनकी गर्दन रेतकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में चिंता देवी के बयान पर गांव के 14 लोगों सहित कुल 70 लोगों को अभियुक्त बनाया गया था। चिंता देवी के पति अवध किशोर शर्मा व उनके बेटे मधुकर की भी वारदात में हत्या कर दी गई थी।

यह मुकदमा लंबे समय तक चला। इस दौरान वादी चिंता देवी की पांच साल पहले मौत हो चुकी है। चार आरोपियों की भी मौत हो चुकी है। 34 का ट्रायल पूरा हो चुका है, जिनकी गिरफ्तारी हो चुकी थी। ये सभी जेल में हैं। इस हत्याकांड के 66 गवाहों में से 32 ने सुनवाई के दौरान गवाही दी।

 

 

सेनारी नरसंहार में कोर्ट ने 15 को ठहराया दोषी

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