नई दिल्ली। प्राइवेट स्कूलों पर लगातार मिल रही शिकायतों के बाद केंद्र सरकार ने लगाम लगाने का फैसला किया है। अब सरकार ने तय किया है कि 2017-18 सत्र से देश के सभी सीबीएसई स्कूलों को एनसीईआरटी की किताबों को ही पाठ्यक्रम में चलाना होगा। सरकार के इस फैसले से उन लाखों अभिभावकों को राहत मिलेगी जिन्हें प्राइवेट सीबीएसई स्कूल निजी प्रकाशकों की पुस्तकें खरीदने के लिए मजबूर करती हैं। निजी प्रकाशकों की किताबों का दाम एनसीईआरटी के मुकाबले 300 से 600 फीसद ज्यादा होता है।

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के अनुसार, यह फैसला केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर की अध्यक्षता वाली एक समीक्षा बैठक में लिया गया। रिपोर्ट में मानव संसाधन विकास मंत्रालय में पदस्थापित एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि एनसीईआरटी को पर्याप्त संख्या में मार्च के अंत तक देश भर में पुस्तक उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है ताकि शैक्षिक सत्र 2017-18 के लिए अप्रैल तक की सीमा पूरी हो सके। सभी सीबीएसई स्कूलों को 22 फरवरी, 2017 तक सीबीएसई की वेबसाइट पर मांग ऑनलाइन जमा करनी होगी।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय का यह फैसला स्कूलों और अभिभावकों की शिकायत पर आया है। उनलोगों की शिकायत थी कि एनसीईआरटी की किताबें समय पर उपलब्ध नहीं होती हैं। कई अभिभावकों ने यह भी शिकायत की थी कि स्कूल निजी प्रकाशकों की काफी महंगी किताबें बेच रहे हैं।

इसके अलावा ये स्कूल पेंसिल, इरेजर्स और स्टेशनरी भी मनमाने दामों पर बेचते हैं। ये चीजें अगर अभिभावक बाजार से खरीदें तो उनको बहुत कम खर्च पड़ेगा। इसके अतिरिक्त यह भी देखा है कि कई निजी प्रकाशक प्राइवेट स्कूलों के हेड का स्विट्जरलैंड जैसे देशों का खर्च भी उठाते हैं।

इसके अलावा केंद्र सरकार स्कूल बैग को हल्का करने पर काम कर रही है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एचआरडी) इस संबंध में सीबीएसई स्कूलों के लिए नियम-कायदे तय करने जा रहा है। एचआरडी मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बुधवार को इसकी जानकारी दी।

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) के कार्यक्रम में उन्होंने कहा, “मैं स्कूल बैग का वजन कम करने जा रहा हूं…भारी बैग ढोना कतई जरूरी नहीं है। मंत्रालय सीबीएसई स्कूलों के लिए नियम बना रहा है, जिससे बच्चों को अनावश्यक किताबों और नोटबुक का बोझ न उठाना पड़े।”

सीबीएसई के मौजूदा निर्देश के अनुसार, दूसरी कक्षा के बच्चों के लिए स्कूल बैग लाना प्रतिबंधित है। कक्षा आठ तक के छात्रों के लिए सीमित मात्रा में किताब लाने की व्यवस्था की गई है। एचआरडी मंत्रालय इसे और ज्यादा प्रभावी बनाने पर काम कर रहा है।

सीबीएसई स्कूलों को एनसीईआरटी की किताबों को ही पाठ्यक्रम में चलाना होगा

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