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लखनऊ ।विधानसभा चुनाव समय से हो भी जाएं तब भी नगरीय निकाय (नगर निगम, नगर पालिका परिषद व नगर पंचायत) चुनाव वक्त से नहीं हो सकेंगे। मौजूदा निकायों का कार्यकाल अगले वर्ष अगस्त में खत्म हो रहा है जबकि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग का मानना है कि सितंबर-अक्टूबर से पहले निकाय चुनाव कराना संभव न होगा। कारण है कि सपा सरकार ने अब तक न केवल बड़ी संख्या में नई नगरीय निकायों का गठन करने के साथ ही वर्तमान निकायों का दायरा बढ़ाया है बल्कि यह सिलसिला विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने तक जारी रहने की भी उम्मीद है।

दरअसल, नगरीय निकाय व पंचायत चुनाव कराने का दायित्व संभालने वाले राज्य निर्वाचन आयोग ने वर्ष 2012 में सूबे के नगरीय निकायों के चुनाव की अधिसूचना 25 मई को जारी की थी। चार चरणों में चुनाव की प्रक्रिया पूरी कर आयोग ने 13 जुलाई को निकायों के गठन की अधिसूचना भी कर दी थी। चूंकि अधिसूचना से सप्ताहभर में नवनिर्वाचितों की शपथ और एक माह में अनिवार्य रूप से सदन की पहली बैठक करने के निर्देश दिए गए थे इसलिए नियमानुसार सभी निकायों का कार्यकाल 13 अगस्त को समाप्त हो रहा है।
ऐसे में सामान्य परिस्थितियों में आयोग को अगले वर्ष 13 अगस्त से पहले निकाय चुनाव की प्रक्रिया पूरी कर लेनी चाहिए, लेकिन आयोग का ही मानना है कि चुनाव की प्रक्रिया तय अवधि में पूरा करना संभव नहीं लग रहा है। समय से चुनाव न करा पाने के पीछे आयोग के ठोस तर्क हैं। आयोग का मानना है कि विधानसभा चुनाव चाहे फरवरी-मार्च में हो या फिर अप्रैल-मई में, नई सरकार बनने के बाद ही निकाय चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। आयोग का कहना है कि मौजूदा सरकार में बड़ी संख्या में नई निकाय बने और बनाए जा रहे हैं। गांवों को शामिल कर मौजूदा निकायों का क्षेत्रफल भी बढ़ाया जा है इसलिए चुनाव कराने से पहले ऐसी निकायों का पहले-पहल परिसीमन कराना होगा जिसमें 40-45 दिन लगेंगे।

इसके बाद मतदाता सूची के पुनरीक्षण और फिर आरक्षण की प्रक्रिया में भी सवा-सवा माह लगेगा। निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी करने से पहले ही न्यूनतम तीन से चार माह तक का समय चाहिए, जिससे मई में निकाय चुनाव की अधिसूचना संभव नहीं है। हालांकि संविधान में दी गई व्यवस्था मुताबिक निकायों का कार्यकाल खत्म होने के छह माह में चुनाव कराना जरूरी है इसलिए आयोग अपनी तरह से जल्द से जल्द चुनाव कराने की कोशिश करेगा। राज्य निर्वाचन आयुक्त एसके अग्रवाल का कहना है कि व्यावहारिक दिक्कतों को देखते हुए भले ही निकाय चुनाव तय अवधि में कराना संभव न हो लेकिन उनकी कोशिश रहेगी दो-तीन माह से ज्यादा चुनाव न टलें। ऐसे में अक्टूबर में चुनाव कराए जा सकते हैं क्योंकि न तब भीषण गर्मी-बरसात का मौसम होगा और न ही कड़ाके की ठंड।

 

सितंबर-अक्टूबर से पहले निकाय चुनाव कराना संभव न होगा: राज्य निर्वाचन आयोग

| उत्तर प्रदेश, लखनऊ | 0 Comments
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