साढ़े चार वर्ष की अनन्या वर्मा ने नौंवीं कक्षा में दाखिला लिया है। वह अंग्रेजी में माकरे पोलो का पाठ जितने फर्राटे से पढ़ती है, उतना ही हिंदी में रसखान के दोहे पढ़ लेती है। इस विलक्षण बेटी को ज्ञान की यह थाती परिवार से ही मिली। बड़ी बहन सुषमा वर्मा 16 साल की उम्र में पीएचडी कर रही है, वहीं बड़े भाई शैलेंद्र वर्मा ने सिर्फ 14 साल में बीसीए किया था और अब वह बेंगलुरू में नौकरी कर रहा है। विलक्षण प्रतिभा के धनी इन बचों के पिता तेज बहादुर वर्मा सिर्फ आठवीं पास हैं और मां छाया देवी कभी स्कूल नहीं गईं। तीनों बचों को खेल-खेल में पढ़ाने के तरीके से विलक्षण बना दिया।
राजधानी में बरिगवां में रहने वाले तेज बहादुर वर्मा की सबसे छोटी बेटी अनन्या का जन्म एक दिसंबर 2011 को हुआ था। पिता बताते हैं कि सिर्फ ढाई साल की उम्र में श्रीरामचरितमानस और गीता का पाठ करने लगी। उन्होंने कभी पढ़ने-लिखने के लिए अपने बचों की बात नहीं टाली। मूलरूप से रायबरेली के तिलोई में रहने वाले तेज बहादुर कहते हैं कि पत्नी छाया देवी स्कूल भले ही कभी नहीं गईं, मगर बचों को पढ़ाने के लिए उन्होंने ककहरा सीखा। हम घर में बचों के साथ खेल-खेल में पढ़ाई कराते हैं।

 

साढ़े चार साल की अनन्या ने नौवीं कक्षा में लिया दाखिला

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