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नई दिल्ली। दीवाली पास आ गई है और बच्चों ने पटाखों को खरीदना और चलाना भी शुरू कर दिया है। छोटे बच्चों को सबसे ज्यादा पसंद सांप गोली आती है, जिसे जलाने के बाद दवा जैसी गोली सांप की तरह बनती जाती है। मगर, अब एक अध्ययन में सामने आया है कि यह सबसे ज्यादा मात्रा में PM 2.5 छोड़ता है।

शायद पहली बार इस तरह का अध्ययन किया गया है, जिसमें पटाखों से होने वाले प्रदूषण के बारे में पता चला है। चेस्ट रिसर्च फाउंडेशन (सीआरएफ) और पुणे विश्वविद्यालय में शोधकर्ताओं के निष्कर्षों के अनुसार, एक सांप गोली केवल 12 सेकंड में जल जाती है। मगर, उतनी देर में यह PM2.5 के 64,500 एमसीजी/एम3 पैदा करता है, जिसका प्रभाव तीन मिनट तक रहता है।

PM2.5 की स्वीकार्य सीमा सिर्फ 50 एमसीजी/एम3 है। 2.5 माइक्रोन से कम व्यास वाले कण फेफड़ों के गहरे भागों तक पहुंच सकते हैं और अधिक नुकसान हो सकता है। इसके बाद, 1000 लड़ों वाली लड़, रंग-बिरंगी फुलझड़ी, चकरी और अनार भी ज्यादा प्रदूषण फैलाते हैं।

सीआरएफ के निदेशक और इस अध्यन के प्रमुख डॉ संदीप साल्वी ने कहा कि यह शायद पहली बार हुआ है कि अलग-अलग पटाखों के बीच PM2.5 के स्तर को मापा गया है और उनकी तुलना की गई है। उन्होंने कहा कि इन निष्कर्षों यूरोपीय रेस्पिरेटरी सोसाइटी में इस साल सितंबर में प्रस्तुत किए गए।

हमारा उद्देश्य यह पता लगाना था कि दिवाली के समय में इस्तेमाल होने वाली आतिशबाजी में कौन से पटाखे पर्यावण में सबसे ज्यादा पीएम छोड़ता है। साल्वी ने कहा कि इन प्रयोगों पिछले साल नवंबर-दिसंबर में किया गया था।

 

सांप की गोली फैलाती है सबसे ज्यादा वायु प्रदूषण

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