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चकबंदी आयुक्त डॉ. हरिओम पर हमला करने वाले चकबंदी अधिकारी राकेश पांडेय को सस्पेंड कर दिया गया है। विभागीय जांच बाराबंकी के उप संचालक चकबंदी (डीडीसी) को सौंपी गई है।

माना जा रहा है कि हमलावर को उकसाने में कुछ विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों का भी हाथ है, इसलिए जांच अधिकारी उन्हें चिह्नित करने का काम भी करेंगे। बुधवार को तबादला रुकवाने इंदिरा भवन में चकबंदी आयुक्त दफ्तर पहुंचे राकेश पांडेय और उसके बेटे मोहित ने चकबंदी आयुक्त डॉ. हरिओम पर हमला कर दिया था।

हालांकि कर्मचारियों के चकबंदी आयुक्त के कक्ष में पहुंचने पर वे असलहे लहराते हुए भाग गए। बता दें, करीब एक महीने पहले राकेश पांडेय का अमेठी से बलिया ट्रांसफर कर दिया गया था, लेकिन उसने वहां जॉइन नहीं किया। वहीं, अमेठी में दूसरे अधिकारी के कार्यभार ग्रहण कर लेने से वह वहां से स्वत: रिलीव हो गया। तबादला न रुकने से खफा राकेश पांडेय ने चकबंदी आयुक्त पर हमले की साजिश रची।

चकबंदी आयुक्त ने बृहस्पतिवार को बाराबंकी के उप संचालक चकबंदी चंद्रिका प्रसाद यादव को पूरे मामले की जांच सौंपी। उन्हें 15 दिन के भीतर जांच रिपोर्ट देने को कहा गया है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि लगभग ढाई साल बाद 15 फरवरी को डॉ. हरिओम के रूप में पूर्णकालिक चकबंदी आयुक्त की नियुक्ति की गई है।

इससे पहले प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारियों को अतिरिक्त चार्ज देकर काम चलाया जा रहा था। इसलिए विभागीय अधिकारी ही अपने स्तर पर अधिकांश निर्णय ले रहे थे।

लिहाजा ये डॉ. हरिओम की तैनाती को पचा नहीं पा रहे हैं। चकबंदी अधिकारी राकेश पांडेय को उकसाने में इन अधिकारियों का भी हाथ माना जा रहा है। जांच अधिकारी इस बिंदु पर भी जांच करेंगे, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना न हो।

डॉ. हरिओम ने भी स्वीकार किया कि हमला योजनाबद्ध ढंग से किया गया था। यही वजह थी कि राकेश पांडेय के बेटे मोहित ने उनसे मिलने के लिए भेजी गई स्लिप में अपना नाम दिनेश पांडेय लिखा था, ताकि बाद में उसकी असली पहचान सामने न आ सके।

चकबंदी आयुक्त डॉ. हरिओम ने शासन से पर्याप्त सुरक्षा की मांग की है। उन्होंने बताया कि दफ्तर में सुरक्षा कर्मी तैनात किए जाने के साथ ही उन्हें भी अधिक सुरक्षा की जरूरत है। इसके लिए शासन को पत्र भेजा जा रहा है।

सस्पेंड आईएएस हरिओम का गला दबाने वाला दबंग अधिकारी

| उत्तर प्रदेश, लखनऊ | 0 Comments
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