चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अगुवाई वाले सुप्रीम कोर्ट कलीजियम ने देश के उच्च न्यायालयों के पूर्ण मुख्य न्यायाधीशों के लिए 9 नाम सरकार को भेजे हैं। अगर सरकार इन नामों पर मुहर लगाती है तो यह अब तक की मुख्य न्यायाधीशों की सबसे बड़ी नियुक्ति होगी। देश के कई उच्च न्यायालयों में लंबे समय से कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश कार्यभार देख रहे हैं। इन सिफारिशों को लंबे समय से जजों की नियुक्ति को लेकर न्यायपालिका और सरकार में तकरार के बीच एक बड़े कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

अक्टूबर 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने नैशनल जूडिशल अपॉइंटमेंट कमिशन (एनजेएसी) को असंवैधानिक करार दे दिया था, तब से सरकार और जूडिशरी के बीच कोल्ड वॉर जारी है। कलीजियम की ज्यादातर सिफारिशों को कुछ न कुछ कारणों से सरकार ठुकरा रही थी। इसके चलते सुप्रीम कोर्ट में आठ जजों की कमी हो गई, जो अब तक शीर्ष अदालत में सबसे ज्यादा रिक्त पदों की संख्या है। दिसंबर 2015 से पूर्व चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अगुआई वाले कलीजियम ने सरकार से सुप्रीम कोर्ट में किसी जज के नाम की सिफारिश नहीं की। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में मई 2016 से कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश है। यहां कार्यभार देख रहे जस्टिस राजेंद्र मेनन अब पूर्ण मुख्य न्यायाधीश के तौर पर पटना हाई कोर्ट जाएंगे।

जजों की नियुक्ति पर मौजूदा प्रक्रिया ज्ञापन के मुताबिक किसी कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति एक महीने से ज्यादा के लिए नहीं की जा सकती। जस्टिस अभिलाषा कुमारी को साल 2006 में गुजरात हाई कोर्ट में जज नियुक्त किया गया था। वह हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता वीरभद्र सेन की बेटी हैं। वह त्रिपुरा हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस बनेंगी। जस्टिस टी वैपेयी फिलहाल त्रिपुरा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस हैं, उन्हें हैदराबाद हाई कोर्ट भेजा जाएगा। वह यहां पिछले साल जुलाई से कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश की भूमिका में हैं।

सरकार की मंजूरी मिली तो होगी सबसे बड़ी नियुक्ति

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