समाजवादी पार्टी के अंदर चल रहे सियासी उठापटक से कार्यकर्ता आहत हैं। 30 दिसंबर को अखिलेश के पार्टी से निष्कासन की खबर टीवी पर देखकर पचास वर्षीय सपा कार्यकर्ता जाकिर हुसैन की हालत बिगड़ गई थी। उनको बरेली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। रविवार को जाकिर हुसैन ने दम तोड़ दिया। जिससे परिवार में कोहराम मच गया। नगर के मोहल्ला नसीराबाद निवासी सपा कार्यकर्ता जाकिर हुसैन (50) मेलों और उर्स में स्टॉल लगाकर गुब्बारों पर बंदूक से निशाना लगवाकर अपनी गुजर बसर करते थे। परिजनों के मुताबिक 30 जनवरी को उस समय टीवी देखते हुए हालत बिगड़ गई थी, जब सीएम अखिलेश यादव को राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने सपा से छह साल के निष्कासित कर दिया था।

जिस पर जाकिर की हालत बिगड़ गई। परिवार वालों ने उनको बरेली के एक अस्पताल में भर्ती कराया था। सपा कार्यकर्ता कई दिनों से जिंदगी और मौत से जूझ रहे थे। इसी बीच वो कोमा में चले गए थे। हालत में सुधार न होने पर शनिवार को डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए थे। परिवार वाले उनको अपने घर ले आए। रविवार को जाकिर ने दम तोड़ दिया। जिससे उनकी मौत पर परिवार में कोहराम मच गया है।

बताते हैं कि जाकिर हुसैन ने पिछली बसपा सरकार में आजम खां के नेतृत्व में रामपुर में हुए जेल भरो आंदोलन में गिरफ्तारी दी थी। सपा कार्यकर्ता की मौत पर स्थानीय सपाइयों ने शोक जताया। वहीं सपा नेता इकरार हुसैन का कहना है कि जाकिर की मौत का सभी को दु:ख है और आला नेताओं को जानकारी दी जाएगी।

सपा में चल रहे विवाद से परेशान अखिलेश समर्थक ने दम तोड़ा

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