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लखनऊ देश के सबसे बड़े राजनैतिक परिवार में कलह चरम पर है। समाजवादी पार्टी की आज लखनऊ में जिलाध्यक्षों की बैठक से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किनारा कर लिया । कल शिवपाल सिंह यादव ने उनको बैठक में शामिल होने के लिए निमंत्रण भी दिया था, इसके बाद भी अखिलेश बैठक में नहीं पहुंचे हैं।

उत्तर प्रदेश में सत्ता पर काबिज रहने का दावा कर रही समाजवादी पार्टी में कलह अब चरम पर है। समाजवादी पार्टी में मचा घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है।

आज जिस तरह से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदेश के जिलाध्यक्षों की बैठक से किनारा किया है, वह तो खुली बगावत के संकेत हैं। अखिलेश यादव के आज की बैठक में शामिल न होने से साफ हो गया है कि वह अभी भी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के पक्ष में नहीं हैं।

समाजवादी पार्टी की दो दिनी बैठक आज से ही लखनऊ में पार्टी के मुख्यालय पर हो रही है। इस बैठक में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को भी शामिल होना था, लेकिन वह इस बैठक से आज पहले ही दिन गायब हो गए। वह पार्टी के कार्यालय नहीं पहुंचे हैं। बैठक की अध्यक्षता शिवपाल सिंह यादव कर रहे हैं।

शिवपाल सिंह यादव इस बैठक के लिए कल शाम को अखिलेश यादव को बुलाने भी पहुंचे थे। इस बैठक को लेकर कल दोनों के बीच करीब दो घंटे तक बातचीत भी हुई थी।

समाजवादी पार्टी मुख्यालय पर जिला अध्यक्षों और महानगर अध्यक्षों की मंथन बैठक जारी है। इस बैठक में शिवपाल यादव, अशोक वाजपेयी समेत अन्य नेता भी शिरकत कर रहे हैं।

आज जिलाध्यक्षों की बैठक में तो अखिलेश यादव नहीं पहुंचे हैं लेकिन कल राज्य कार्यकारिणी और पार्टी के विधान परिषद सदस्यों की बैठक होनी है। माना जा रहा है कि कल अखिलेश यादव बैठक में शामिल होंगे। वैसे भी अखिलेश यादव प्रदेश पार्टी संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष के साथ ही एमएलसी भी हैं।

समाजवादी पार्टी में इन दिनों बैठक का जोर है। सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव 24 अक्टूबर को पार्टी संसदीय बोर्ड की बैठक लेंगे। जिसमें मौजूदा विधायक, सांसद और पूर्व सांसद शिरकत करेंगे। इस मीटिंग में भी अखिलेश यादव के शामिल रहने की उम्मीद है।

पिछले कुछ दिनों से समाजवादी पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। कुनबे में कलह को सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह ने दबा दिया था, लेकिन सपा के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव की ओर से 21 प्रत्याशियों को टिकट देने घोषणा के बाद से ही यह फिर खुलकर सामने आ गई।

गायत्री प्रजापति को इससे पहले अखिलेश यादव ने अवैध खनन के आरोपों पर बर्खास्त कर दिया था। अखिलेश ने चाचा शिवपाल यादव से भी अहम मंत्रालय वापस लिए थे। शिवपाल के बगावती तेवर और सपा अध्यक्ष मुलायम के हस्तक्षेप के बाद अखिलेश यादव को अपने फैसले वापस लेने पड़े। इसके बाद गायत्री प्रजापति को वापस कैबिनेट में शामिल करना पड़ा।

 

 

सपा में कलह चरम पर-मंथन बैठक में नहीं पहुंचे अखिलेश

| उत्तर प्रदेश, लखनऊ | 0 Comments
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