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संसदीय कार्यमंत्री आजम खां ने शुक्रवार को समाजवादी पार्टी के महासचिव रामगोपाल यादव से लंबी गुफ्तगू करके नई अटकलों को जन्म दे दिया। इस मुलाकात को सपा में अमर सिंह के खिलाफ लामबंदी से जोड़कर देखा जा रहा है।

सपा में आजम और रामगोपाल, दोनों ही महासचिव हैं लेकिन उनके रिश्ते गर्मजोशी वाले नहीं माने जाते हैं। दोनों नेता सार्वजनिक मंचों पर तो मिलते रहे हैं लेकिन उनमें निजी मुलाकातें नहीं होती। दोनों ही अमर सिंह विरोधी लॉबी में गिने जाते हैं।

सपा में रामगोपाल और आजम के अलावा कोई भी नेता अमर सिंह के खिलाफ बयानबाजी नहीं करता। 2009 में अमर सिंह के सपा से बाहर होने के पीछे भी इन्हीं दोनों नेताओं की अहम भूमिका थी। अमर सिंह इन दिनों फिर सपा नेतृत्व के नजदीक हैं।

उनकी सपा मुखिया मुलायम सिंह, प्रदेश प्रभारी शिवपाल यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से लगातार मुलाकातें हो रही हैं।
निजी संबंधों का आलम यह है कि शिवपाल के बेटे की शादी के बाद अमर सिंह ने दिल्ली में रिसेप्शन दिया।

अमर सिंह की सपा से नजदीकियों की अटकलों के बीच रामगोपाल की तबियत का हाल जानने के बहाने आजम खां ने उनसे लंबी मुलाकात की।

लंबे समय बाद ऐसा मौका आया है जब आजम दिल्ली में रामगोपाल से मिलने उनके लोधी इस्टेट स्थित आवास पर गए। आजम शनिवार सुबह विदेश रवाना होंगे। उनके साथ राज्यसभा सदस्य मुनव्वर सलीम भी थे। इस मुलाकात को सपा की अंदरूनी राजनीति से जोड़ा जा रहा है।

माना जा रहा है कि सपा में अमर सिंह की एंट्री रोकने के लिए आजम खां, रामगोपाल का सहयोग लेने या देने को तैयार हैं।

पार्टी के एक अन्य महासचिव व राज्यसभा सदस्य किरणमय नंदा भी अमर सिंह विरोधी मुहिम में उनके साथ बताए जाते हैं। ये नेता नहीं चाहते कि विधानसभा चुनाव से पहले अमर सिंह की सपा में वापसी हो या मुलायम के ‘दिल’ में रहकर वे अहम भूमिका निभाएं।

इस मुद्दे पर शिवपाल को सपा मुखिया की राय का समर्थक बताया जाता है लेकिन मुख्यमंत्री अखिलेश बेहद संतुलित रुख अपनाए हुए हैं। वह अमर सिंह से मिलते हैं लेकिन इधर मुख्यमंत्री से भी आजम की मुलाकातें बढ़ी हैं।

सपा में अमर सिंह को रोकने के लिए एक हुए ‘दुश्मन’

| उत्तर प्रदेश, लखनऊ | 0 Comments
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