राज्यपाल के सलाहकार रहे पूर्व जिला जज चन्द्रभूषण पांडेय का कहना है कि चुनाव आयोग में दाखिल पदाधिकारियों की सूची के मुताबिक तो मुलायम ही अभी सपा के अध्यक्ष हैं। अगर आयोग में पिटीशन दायर किया जाता है कि राष्ट्रीय सम्मेलन में अखिलेश को अध्यक्ष चुन लिया गया है तो आयोग मुलायम को नोटिस जारी करेगा।

पिटीशन करने वालों को साबित करना होगा कि राष्ट्रीय सम्मेलन पार्टी के संविधान के अनुसार हुआ है। वे कहते हैं कि सपा के संविधान में अध्यक्ष को ज्यादा अधिकार हैं। इसमें प्रावधान है कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी या राष्ट्रीय अधिवेशन के 40 फीसदी प्रतिनिधियों की मांग पर राष्ट्रीय अध्यक्ष विशेष अधिवेशन बुला सकते हैं।

सम्मेलन मुलायम ने नहीं बुलाया था। यह रामगोपाल यादव ने बुलाया था। उन्हें साबित करना होगा कि राष्ट्रीय सम्मेलन संविधान के अनुसार बुलाया गया था। अगर वे इसे साबित करने में सफल रहे तो अखिलेश को पार्टी अध्यक्ष माना जाएगा। सिम्बल बांटने का अधिकार भी उन्हीं के पास रहेगा।

सपा के संविधान में अध्यक्ष को ज्यादा अधिकार

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