सपा में नाम और निशान को लेकर छिड़ी जंग ने प्रत्याशियों को तो बेचैन कर ही दिया है, सपा के झंडे, बैनर, टोपी और गमझे बना रहीं फैक्ट्रियों को भी नुकसान हो रहा है। दिल्ली और लखनऊ की बड़ी मार्केटिंग कंपनियों से प्रचार सामग्री के जो आर्डर मिले थे वह फिलहाल रद्द करा दिए गए हैं। जिन प्रत्याशियों ने प्रचार सामग्री का आर्डर दिया था उसे भी रुकवा दिया है।

मथुरा में सियासी पार्टियों की प्रचार सामग्री बनाने का काम बड़े पैमाने पर होता है। छोटी-बड़ी 20 फैक्ट्रियां हैं जहां सपा, बसपा, कांग्रेस, रालोद आदि कई पार्टियों के झंडे, बैनर और गमछे बनाए जाते हैं। प्रदेश में जब भी बड़ी रैलियां होती हैं तब यहीं से झंडियां तैयार होकर जाती हैं। अब चुनाव का एलान कभी भी हो सकता है लिहाजा प्रचार सामग्री के होलसेलर सभी पार्टियों के चुनाव चिह्न वाले झंडे और बैनर तैयार करा रहे हैं। सपा के भी झंडे और बैनर बनाने का आर्डर मथुरा की फैक्ट्रियों को दिया गया था। लेकिन अब जब सपा में कलह शुरू हो गई है तब सभी आर्डर रद्द करा दिए गए हैं। कहा गया है कि जब विवाद खत्म हो जाएगा तब आर्डर दिया जाएगा।

जानकी इंटरप्राइजेज के स्वामी विशाल रुहेला कहते हैं कि दिल्ली के थोक व्यापारी ने 45,000 झंडा का आर्डर उन्हें दिया था। चार दिन में माल तैयार करके देना था, लेकिन पार्टी में चल रहे विवाद को देखते हुए आर्डर रुकवा दिया है। फैक्ट्री स्वामी गौरव ने बताया कि झंडियों के चार आर्डर रुकवाए गए हैं। कहा है कि पहले फाइनल हो जाए उसके बाद चुनाव चिह्न और पार्टी के नाम के बैनर और दूसरी सामग्री तैयार कराई जाएगी। कई कारोबारी तो ऐसे हैं जिनके यहां सपा के झंडे तैयार पड़े हैं लेकिन होलसेलर माल उठा ही नहीं रहे हैं। मेरठ, कानपुर, सहारनपुर, बरेली, मुरादाबाद, लखनऊ, गोरखपुर और अलीगढ़ मंडल से प्रत्याशियों ने भी आर्डर दिए थे।

सूरत और अहमदाबाद में भी बन रहे थे झंडे
सूरत और अहमदाबाद में भी प्रचार सामग्री तैयार कराने का बड़ा कारोबार होता है। उत्तर प्रदेश के साथ ही उत्तराखंड तक से झंडे और बैनर के आर्डर सूरत और अहमदाबाद को दिए गए थे। वहां भी फिलहाल काम रुकवा दिया गया है। दरअसल अभी सपा में चेहरा और निशान ही तय नहीं हो पा रहा है।

सपा के झंडे और बैनर के सभी बड़े आर्डर रद्द

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