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सपा ने पनियरा में प्रत्याशी बदला, सुमन को टिकट
समाजवादी पार्टी ने महाराजगंज जिले की पनियरा सीट से घोषित प्रत्याशी कृष्णभान सिंह सैंथवार को बदल दिया है। उनकी जगह सुमन ओझा को उम्मीदवार बनाया गया है।

सुमन के पिता जर्नादन ओझा पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री रह चुके हैं। गत वर्ष उनका निधन हो गया था। कृष्णभान के पिता कैदारनाथ सिंह भी पिपराइच से विधायक रह चुके हैं।
समाजवादी पार्टी कई जिलों में संगठनात्मक बदलाव कर सकती है। शिवपाल सिंह यादव को सपा का प्रदेश प्रभारी नियुक्त किए जाने के बाद इसके आसार बढ़ गए हैं।

ब्लॉक प्रमुख व जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनावों में जिन जिलों में संगठन की भूमिका पर सवाल उठे थे, उन पर गाज गिर सकती है। निष्क्रियता और गुटबंदी के चलते कई जिलों की कमेटियां भंग हो सकती हैं। जिन जिला या महानगर अध्यक्षों को विधानसभा चुनाव के लिए टिकट दिए हैं, उन्हें हटाने की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है।

विधानसभा चुनाव में सालभर भी नहीं बचा। ऐसे में सपा को जिलों में ऐसे अध्यक्षों व संगठन की जरूरत हैं जो नेतृत्व की मंशा के अनुरूप काम कर सकें। कई जिलों में संगठन की सक्रियता प्रदेश नेतृत्व की अपेक्षा के अनुरूप नहीं हैं।

सबसे बड़ी दिक्कत जिलों में गुटबंदी की है। सपा मुखिया पार्टी नेताओं को गुटबंदी से लगातार आगाह करते रहे हैं। कुछ जिलों में जिला या शहर अध्यक्ष खुद गुटबंदी में शामिल हैं। कहीं उन पर मंत्री की छाप लगी हुई है तो कहीं विधायकों की। ऐसे जिलों में अध्यक्षों को हटाए जाने की संभावना है। वहां तटस्थ लोगों को संगठन की बागडोर सौंपी जा सकती है।

कुछ सीटों पर अध्यक्षों को विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशी बना दिया गया है। उनके स्थान पर भी नए अध्यक्ष नामित किए जा रहे हैं। सपा के कई जिला अध्यक्ष स्थानीय प्राधिकारी क्षेत्र से विधान परिषद सदस्य निर्वाचित हो गए हैं।

अंबेडकर नगर के जिलाध्यक्ष हीरा लाल यादव, गोंडा के जिलाध्यक्ष महफूज खां और बदायूं के बनवारी सिंह यादव विधान परिषद सदस्य निर्वाचित हो चुके हैं। इनमें से एक-दो को अध्यक्ष पद से हटाया जा रहा है।

उनके स्थान पर भी किसी दूसरे नेता को जिलाध्यक्ष की बागडोर दी जा सकती है। जिन जिलों में सपा जिला पंचायत और विधान परिषद चुनाव हारी है, उनमें से कुछ जगह संगठन पर कार्रवाई हो सकती है।

सपा ने जिन जिला या महानगर अध्यक्षों को विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशी बनाया है, उनकी जगह नए अध्यक्षों की नियुक्ति प्रारंभ हो गई है।

मेरठ महानगर के अध्यक्ष आदिल चौधरी को मेरठ दक्षिण सीट से उम्मीद्वार बनाया गया है। दो दिन पहले आदिल को हटाकर अलीम अलवी को महानगर की बागडोर सौंप दी गई है।

इसके अलावा शामली के जिलाध्यक्ष किरनपाल कश्यप, शाहजहांपुर के तनवीर अहमद खां, बरेली के जिलाध्यक्ष वीर सिंह यादव और मुजफ्फरनगर के अध्यक्ष श्याम लाल सैनी को उम्मीदवार बनाया गया है।

इन सभी को शीघ्र हटाए जाने की संभावना है। मेरठ जिले की सरधना सीट से प्रत्याशी बनाए जाने के बाद समाजवादी छात्र सभा के प्रदेश अध्यक्ष अतुल प्रधान को हटाकर उनकी जगह दिग्विजय सिंह देव को अध्यक्ष बना दिया गया है।

वाराणसी, रायबरेली, गाजीपुर, जौनपुर समेत कई जिलों में सपा में गुटबंदी की शिकायतें हैं। वाराणसी में तो जिला संगठन को लेकर मची उठापटक खूब चर्चा में रही। जिले के नेताओं के एक खेमे ने राज्यमंत्री सुरेन्द्र पटेल के खिलाफ धरना भी दिया। वहां एक प्रत्याशी के पुतले तक फूंके गए।

हो सकता है वाराणसी समेत कुछ जिलों में सपा की गुटबंदी पर रोक लगाने के लिए संगठन में बदलाव किया जाए। गाजीपुर में स्थानीय प्राधिकारी क्षेत्र से विधान परिषद चुनाव में सपा की हार की गाज भी कुछ लोगों पर गिर सकती है। बुंदेलखंड में भी एक-दो जिलाध्यक्ष हटाए जा सकते हैं।

गौरतलब है कि पनियरा से 2012 के विधानसभा चुनाव में बसपा के देवनारायण उर्फ जीएम सिंह विजयी हुई थी।

सपा कई जिलों में करेगी बड़े बदलाव, दिए संकेत

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