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गोमती में निर्माण कार्य में जमीन जाने के दावे पर सपा एमएलसी मजहर अली खान उर्फ बुक्कल नवाब को जिला प्रशासन ने बगैर किसी जांच के 8.05 करोड़ रुपये मुआवजा का भुगतान कर दिया। हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने इसपर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए इसके जांच के आदेश दिए हैं।

अदालत ने कहा जांच के लिए हाई पावर कमेटी बनाई जाए जो 30 दिन में अपनी रिपोर्ट दे। कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि अगर मुआवजे में दी गई रकम की वसूली में कोई दिक्कत आई तो जिन अफसरों ने भुगतान किया उनसे वसूला जाएगा।

अदालत ने कहा- पेश किए गए तथ्यों से पता चलता है कि ऐसी जमीन जो किसी की निजी मिल्कियत नहीं, फिर भी उसके लिए मुआवजा देकर उसे सरकारी बनाया गया। ऐसे शख्स को मुआवजा दिया गया जो उसके लिए पात्र नहीं था।

जस्टिस सुधीर अग्रवाल और जस्टिस राकेश श्रीवास्तव ने यह आदेश हरीशचंद्र वर्मा की ओर से दायर की गई याचिका पर दिया। दरअसल 2010 में बुक्कल नवाब ने गोमती में चल रहे निर्माण कार्य में अपनी जमीन जाने का दावा किया। जिला प्रशासन ने उन्हें इसके एवज में 8.05 करोड़ रुपये मुआवजा दे दिया।

गोमती में रिवर फ्रंट का काम शुरू हुआ तो बुक्कल नवाब ने एक बार फिर दावा किया कि जियामऊ, जुगौली और भीखमपुर इलाके में उनकी जमीन चपेट में आ रही है। इस दावे को भी सही मानते हुए जिला प्रशासन ने अक्तूबर  2015 में मुआवजा भुगतान की कार्यवाही शुरू कर दी। याचिका में इसका विरोध किया गया।

जस्टिस सुधीर अग्रवाल और जस्टिस राकेश श्रीवास्तव ने कहा कि किसी अफसर ने इन तथ्यों को नहीं जांचा कि क्या दावा सही है या जमीन सरकारी है, जिस पर कोई निजी दावा नहीं कर सकता। मुआवजा देते समय भी कोई जांच नहीं की गई, बल्कि मुआवजा जल्द देने में ही रुचि दिखाई गई।

सपा एमएलसी को दे दिया 8 करोड़ मुआवजा, हाईकोर्ट ने दिए जांच के आदेश

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