mathura-firing_1464907034

मथुरा में जवाहर बाग कब्जाने वाले कथित सत्याग्रह की शुरुआत मध्यप्रदेश के सागर जिले से हुई थी। करीब तीन माह के सफर के बाद दिल्ली की ओर जाने वाली यह यात्रा मार्च 2014 में मथुरा आकर ठहर गई, जिसका अंत खूनी संघर्ष के रूप में गुरुवार को हो गया। स्वाधीन भारत विधिक सत्याग्रह के बैनर तले इस आंदोलन का नेतृत्व करने वाला गाजीपुर निवासी रामवृक्ष यादव था।

यहां सत्याग्रह के नाम पर जो मांगे गिनाई थी, उसमें बाबा जयगुरुदेव का मृत्यु प्रमाण पत्र भी शामिल था। इसके अलावा इनका कहना था कि यह भारत की आजादी नहीं है। यह सब असंवैधानिक है। भारत तो नेताजी सुभाषचंद्र बोस की घोषणा के साथ ही आजाद हो गया था। वर्तमान सरकार असंवैधानिक है। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, डीएम सब अवैध हैं। एक रुपये में 60 लीटर पेट्रोल मिलना चाहिए। ये मुद्रा आजाद हिंद सरकार की नहीं है। आजाद हिंद की सोने की मुद्रा का प्रचलन होना चाहिए।

कभी प्रशासनिक अफसर, कर्मचारी, आम लोगों के लिए मार्निंग वाक का बेहतरीन स्थान जवाहर बाग हुआ करता था। जिले में दूर दराज से कलक्ट्रेट आकर कार्यालयों के चक्कर लगाते थक-हारने वाले ग्रामीणों को यहां आसरा मिलता था। इतना ही नहीं उद्यान विभाग की यह बेहतरीन नर्सरी हुआ करती थी, जो ढाई साल में पूरी तरह से नष्ट की जा चुकी है।

 

‘सत्याग्रहियों’ की अजीबोगरीब मांगें,

| उत्तर प्रदेश | 0 Comments
About The Author
-