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सऊदी अरब और यूएई के यात्रा के बाद इस्लामिक देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने की दिशा में प्रयासरत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब मई के अंत में ईरान की आधिकारिक यात्रा करेंगे।

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, प्रधानमंत्री की इस यात्रा के दौरान ऊर्जा, कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे से संबंधित प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। चाबाहार समझौता इनमें से एक है जिसे भारत, अफगानिस्तान और ईरान द्वारा अंतिम रूप दिया जा रहा है। इस पर केवल हस्ताक्षर किए जाने है, जबकि दूसरा प्रमुख मुद्दा ऊर्जा से संबंधित होगा। दोनों देश फरजाद बी गैस क्षेत्र में भारत की हिस्सेदारी पर भी बातचीत कर रहे हैं।

लेकिन मध्य-पूर्व में तेजी से बदलाव हो रहा है। परमाणु करार के बाद, ईरान ने एक क्षेत्रीय शक्ति के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत की है, यही कारण है कि इससे ईरान की सुन्नी अरब शक्तियों, विशेष रूप से सऊदी अरब के साथ टकराव सी स्थिति बन गई है।

भारत इस क्षेत्र में बेहतर संतुलन के साथ अपने रिश्तों को मजबूत करना चाहता है। दिलचस्प बात यह है, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और सऊदी अरब में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं जबकि ईरान में नहीं।

पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज एक के बाद एक तेहरान का दौरा कर चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तेहरान की यात्रा तब करेंगे जब ईरान से प्रतिबंध हटाए जा चुके हैं।

मई महीने में वह किस तारीख को जाएंगे, इसे अभी तय किया जा रहा है। ईरान के बाद वह जून महीने की शुरुआत में कतर जाएंगे। कतर में ऊर्जा डील के साथ प्रवासियों के मुद्दे पर समझौते होंगे। इसके अलावा क्षेत्रीय चुनौतियां भी दोनों देशों के एजेंडे में होंगे। दोहा स्टेडियम में प्रधानमंत्री भारतीय आप्रवासियों को भी संबोधित करेंगे। इससे पहले मोदी दुबई, अमरीका, कनाडा, यूके, ऑस्ट्रेलिया और चीन में ऐसा कर चुके हैं। कतर में बड़े पैमाने पर भारतीय आप्रवासी रहते हैं।

 

सऊदी और यूएई के बाद अब ईरान का दौरा करेंगे पीएम मोदी

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