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श्रमजीवी विस्फोट कांड के आरोपी ओबेदुर्रहमान, हिलाल और नफीकुल के मामले में शनि‍वार को यहां होने वाली सुनवाई टल गई है। हिलाल और नफीकुल के यहां नहीं आने की सूचना हैदराबाद के चंचलगुड़ा जेल से आई है। वहां एक अन्‍य केस में उनकी सुनवाई होनी है। इस कांड में 30 जुलाई को आरोपी रोनी को फांसी की सजा सुनाई गई थी। उसे नैनी जेल भेजा गया है

– इस केस के आरोपी रोनी ने हाईकोर्ट में अपील के लिए जेल अधीक्षक को प्रार्थना पत्र भी दिया है।
– न्याय मित्र श्याम शंकर तिवारी का कहना है कि हाईकोर्ट में अपील की तैयारी हो चुकी है। एक दो दिन में अपील हो जाएगी।
– आरोपी ओबेदुर्रहमान का फैसला टल गया था।
– इसका कारण यह था कि‍ हैदराबाद की जेल से पत्र आया था कि पत्रावली में ओबेदुर्रहमान, हिलाल और नफीकुल की चार्जशीट एक साथ आई है। उनके गवाह भी एक ही हैं।
– जांच के दौरान ओबैदुर्रहमान को नौ मई 2006 को मुर्शिदाबाद जेल से वारंट बी के जरिए जौनपुर लाया गया था।
– इससे पहले 23 जनवरी 2006 को फॉरनर्स एक्ट के तहत उसकी गिरफ्तारी हुई थी।
– तब से वह मुर्शिदाबाद के बहरामपुर जेल में बंद था।
– पुलिस मुठभेड़ में मारे गए लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी याहिया के साथ उसे बम बनाने में शामि‍ल रहने की पुष्‍टि‍ हुई थी। इसी बम से श्रमजीवी एक्‍सप्रेस में विस्फोट हुआ।
– ओबैदुर्रहमान के मामले में कुल 46 गवाहों की पेशी हुई थी।
– उस पर यह भी आरोप है कि बम बनाने के बाद वह बांग्लादेश चला गया।
– वहां विस्फोट की एक घटना के बाद भागकर फिर भारत आया। बाद में मुर्शिदाबाद में गिरफ्तार किया गया।

पहली बार कब आया नाम सामने

– वाराणसी निवासी आतंकी अब्दुल्ला के बयान से इसका नाम पहली बार उजागर हुआ था।
– देशद्रोह के आरोप में कोलकाता जेल में बंद अब्दुल्ला, जमदेशपुर के तारीक अख्तर और नूर मोहम्मद ने भी जांच एजेंसि‍यों को ओबैदुर्रहमान के बारे में जानकारी दी थी।
– उन्‍होंने जांच एजेंसि‍यों को बताया था कि‍ ओबैदुर्रहमान लश्करे तैयबा के अलावा आईएसआई के लिए भी काम करता था। इस बात का उल्लेख केस डायरी में भी है।

कुल 7 आरोपी में से 4 पकड़े गए थे

– इस मामले में कुल 7 आरोपी थे। इनमें से 4 पकड़े गए थे।
– मो. आलमगीर उर्फ रोनी बांग्‍लादेश का रहने वाला है।
– आतंकी रोनी 29 जुलाई को दोषी करार दिया गया था।
– उसे 30 जुलाई को फांसी की सजा सुनाई गई।
– उसके साथ ओबेदुर्रहमान के अलावा अन्‍य आरोपी हिलाल और नफीकुल विश्वास हैं।
– हिलाल और नफीकुल विश्वास आंध्र प्रदेश की जेल में बंद हैं। वहां सुनवाई चल रही है।
श्रमजीवी ब्लास् कांड में मारे गए थे 12 लोग
– यह घटना 28 जुलाई 2005 के शाम की है।
– लखनऊ डि‍वीजन के हरपालगंज और कोइरि‍पुर स्‍टेशन के बीच शाम करीब 5.15 बजे श्रमजीवी एक्‍सप्रेस के जनरल डि‍ब्‍बे के ट्वाइलेट में ब्‍लास्‍ट हुआ।
– यह ट्रेन पटना से दि‍ल्‍ली जा रही थी। ट्रेन लेट हो गई थी।
– जि‍स समय ब्‍लास्‍ट हुआ उस समय सही समय पर चलने पर इसे सुल्‍तानपुर स्‍टेशन पर रहना चाहि‍ए था।
– यदि‍ वहां ब्‍लास्‍ट हुआ होता तो ज्‍यादा नुकसान हो सकता था।
– इसमें 12 लोग मारे गए थे और 60 घायल हुए थे।
– घायलों को बीएचयू के सर सुंदरलाल हॉस्‍पि‍टल में इलाज के लि‍ए एडमि‍ट कराया गया था।
– ट्रेन के गार्ड जफर अली ने जीआरपी थाने में केस दर्ज कराया था।
– बाद में विवेचना में इस घटना के पीछे लश्कर और हूजी आतंकी संगठनों का नाम सामने आया था।

कहां हैं अन् आरोपी
– विस्फोट कांड का मास्टर माइंड आरोपी कंचन उर्फ शरीफ अभी तक पुलिस की गिरफ्त में नहीं आ सका है।
– आरोपी याहिया उर्फ गुलाम पजदानी की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो चुकी है।
– आरोपी डॉक्टर सईद के नाम-पता की जांच पूरी नहीं हुई है।
तीन जांच अधि‍कारी बदले गए
– श्रमजीवी विस्फोट कांड की जांच राजाराम शास्त्री, शिवबरन सिंह, शेषनाथ सिंह और परमहंस मिश्रा ने की।
– तीन जांच अधि‍कारी केस के दौरान बदले गए।
– आरोपी रोनी 15 अगस्त 2007 को वारंट बी पर जौनपुर सीजेएम कोर्ट लाया गया।
– जांच अधि‍कारी परमहंस मिश्रा की प्रार्थना पर सीजेएम ने रिमांड स्वीकृत किया

श्रमजीवी विस्फोट कांड: हैदराबाद से नहीं आए हिलाल और नफीकुल, टली केस की सुनवाई

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