शहीद के पिता ने इसे प्रज्‍वलि‍त कि‍या।

शहर के मोहनलालपुर में मंगलवार को देश के शहीदों की याद में 151 किलो की मिट्टी का दीया 101 लीटर तेल से जलाया गया। दावा किया जा रहा है कि यह दुनिया का सबसे बड़ा दीपक है। इसे करीब 7 हजार रुपए की लागत से 48 दिन में तैयार कि‍या गया। लोग इसे लिम्का बुक में दर्ज कराने की मांग कर रहे हैं।
इसे श्रीश्री लक्ष्‍मी पूजा नवयुवक समिति और सूर्यकुंडधाम जीर्णोद्धार समिति ने मि‍लकर तैयार कराया है। इसके सदस्‍यों का कहना है कि‍ लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड से संपर्क कि‍या गया है, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। समिति‍ के सदस्य विशाल गुप्‍ता ने बताया कि पिछले कई साल से ये लोग मां लक्ष्‍मी की प्रतिमा स्‍थापित कर रहे हैं। इस साल देश के शहीदों के लिए कुछ अलग करने का निर्णय लिया गया। इसी के तहत यह दीया बनाया गया।
उन्होंने कहा की समिति ने इस बार जो लक्ष्‍मी प्रतिमा स्‍थापित की है, वह भी भारत माता की तरह चार सिंह पर सवार है। उसके आगे शहीद जवानों की फोटो लगाई गई है। शहीदों की याद में विश्व के सबसे बड़े दीये को शहीद नीरज के पिता रविन्द्र पाण्डेय ने जलाया। इस अवसर पर देश के शहीदों को याद किया गया।

शहीदों की याद में 101 लीटर तेल से जला 151 किलो का दीया

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