sarvesh_1466715589

बदायूं में बदमाशों से मुठभेड़ में शहीद हुए दरोगा सर्वेश कुमार यादव के परिजनों ने पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाया है। पुलिस लाइंस में सलामी के बाद जैसे ही आईजी ने सांत्वना दी घर वाले फट पड़े। एसओ की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक सिपाही के साथ वो भी बिना वर्दी के टीम को बदमाशों को पकड़ने भेजने की क्या जरूरत थी। सर्वेश को मुठभेड़ के लिए भेजकर मरवा दिया। भाइयों ने कहा कि सर्वेश की मौत की जिम्मेदारी अफसरों की भी है। उन्होंने कहा कि मामले की मजिस्ट्रेटी जांच होनी चाहिए।

बिनावर थाना क्षेत्र के घटबहेटी गांव के पास मुठभेड़ में सर्वेश के शहीद होने की सूचना मिलने पर उनके छोटे भाई अवधेश कुमार यादव, उमेश यादव और कन्नौज के दरोगा दोस्त सत्यदेव सिंह यादव समेत कई लोग बुधवार को देर रात ही बरेली पहुंच गए। बृहस्पतिवार की सुबह  पोस्टमार्टम के बाद शव को पुलिस लाइन लाया गया। यहां आईजी विजय सिंह मीना, डीआईजी आशुतोष कुमार, एसएसपी आरके भारद्वाज के  अलावा एसएसपी बदायूं समेत तमाम अफसर पहुंचे।

दरोगा को शोक सलामी के साथ विदाई दी गई। सलामी के बाद आईजी जैसे ही परिवार वालों को सांत्वना देने लगे, उन्होंने नाराजगी जतानी शुरू कर दी। दरोगा के भाई अवधेश कुमार यादव मथुरा में पुलिस विभाग में चालक हैं। उन्होंने कहा कि एसओ की नादानी से उनका भाई मारा गया है। दो पुलिस कर्मियों की टीम कौन बनाता है। उसी ने उनके भाई को मौत के मुंह में भेजा। छोटा भाई उमेश आईटीबीपी में दिल्ली में तैनात हैं। उमेश ने भी अपने भाई की मौत पर सवाल खड़े करते हुए मामले की मजिस्ट्रेटी जांच कराने की मांग करी।

सर्वेश के दोस्त दरोगा सत्यदेव यादव ने कहा कि इस तरह मुठभेड़ कहीं होती है। एक सिपाही को दरोगा के साथ सादे कपड़ों में भेजा ही नहीं जाना चाहिए था। ऐसा भी नहीं था कि कोई बहुत बड़ी लूट हो गई थी। सफेद रंग की बाइक पर बदमाशों के घूमने की सूचना मिलने पर बिना वर्दी में फोर्स को भेजने की जल्दी क्यों की गई। एसओ ललित मोहन के फैसले की वजह से सर्वेश की जान गई है। आईजी विजय सिंह ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि वह इस मामले की सीओ स्तर से जांच करा रहे हैं। रिपोर्ट आने के बाद दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

बदायूं के बिनावर थाना इलाके के दरोगा सर्वेश यादव के शहीद होने से उनके परिवार में बेहद नाराजगी है। पुलिस लाइंस में आला अफसरों के बात करते समय वह भड़क जाते थे। दोस्त दरोगा सत्यदेव सिंह यादव ने तो यहां तक कह दिया कि शोक सलामी के दौरान शहीद के शव पर फूल चढ़ाकर सब भूल जाते हैं। यहां से शव जाने के बाद कोई सर्वेश को याद नहीं करेगा। इसके बाद परेशान तो हम लोगों को होना है।

एटा के थाना निधौली कला के अहरमई गांव में सर्वेश की पत्नी सुनीता यादव, 17 साल की बेटी दीक्षा, चौदह साल का बेटा निशंक, दस साल के कृष्णा के पापा तो चले गए। उनकी परवरिश कौन करेगा। सर्वेश के परिवार बच्चों की पढ़ाई की वजह से गाजियाबाद में रहता था। चार भाईयों में सबसे बड़े भाई वीरपाल पीएसी में थे। उनकी बीमारी से पहले ही मौत हो चुकी है। दूसरे भाई राजेश शिक्षक थे। उनक निधन भी बीमारी से हो चुका है। आईटीबीपी में तैनात सर्वेश के भाई उमेश यादव ने बताया कि उन दोनों भाईयों के परिवार वालों को तो हम पालन पोषण कर ही रहे थे। तीसरे भाई की मौत से उनका पूरा परिवार बिखर गया है। उनका भाई बेहद जांबाज था।

आईजी बोले, सीएम के सचिव का फोन आया था
आईजी विजय सिंह मीना ने कहा कि दरोगा सर्वेश यादव की मौत से उन्हें भी बड़ा नुकसान हुआ है। बृहस्पतिवार की सुबह ही सीएम के सचिव के फोन आया था। उन्होंने मृतक के परिवार वालों को ज्यादा से ज्यादा मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया है। शहीद दरोगा को वेतन के बराबर पेंशन मिलती रहेगी। मृतक आश्रित को नौकरी तो मिलेगी ही। इसके अलावा भी अपने स्तर से दरोगा के परिवार को ज्यादा से ज्यादा मदद दिलाने की कोशिश करेंगे।

 

साधारण एंबुलेंस देखकर परिजनों ने आपत्ती की। उनका कहना था कि क्या एसी एंबुलेंस भी नहीं हम दे सकते। इस पर आईजी ने फौरन एसी एंबुलेंस के लिए पुलिस को दौड़ा दिया। सेटेलाइट से चौकी चौराहा चौकी इंचार्ज वीरेंद्र सिंह राणा एसी एम्बुलेंस लेकर पहुंचे तो शव को उसमें रखवाकर एटा के लिए रवाना किया गया।

पुलिस लाइंस में दरोगा के शव को घर तक भेजने के लिए खटारा सरकारी गाड़ी खड़ी थी। शोक सलामी के बाद आईजी, डीआईजी जैसे ही शव को कंधा देते हुए एंबुलेंस के पास पहुंचे परिवार वालों ने विरोध करना शुरू कर दिया। उनका कहना था कि आठ घंटे का सफर है। लाश को बिना एसी के एंबुलेंस से नहीं ले जाया जा सकता है। इसलिए एंबुलेंस भेजनी है तो एसी मंगाईए। इस पर आईजी ने कोतवाली इंस्पेक्टर सुधीर पाल धामा से एंबुलेंस मंगाने को कहा। उन्होंने चौकी इंचार्ज को चौकी चौराहा एंबुलेंस लेने के लिए भेज दिया।

पीठ में गोली लगने से हुई मौत
दरोगा सर्वेश कुमार यादव के शव का पोस्टमार्टम बृहस्पतिवार को हुआ, जिसमें उनकी मौत गोली लगने से होने की पुष्टि हुई है। दरोगा के सीने से धंसी 315 बोर की गोली को निकाला गया, गोली पीठ पर मारी गई है। इसके अलावा शरीर पर किसी भी तरह के निशान नहीं पाए गए हैं।

‘शहादत पर गर्व लेकिन बिना तैयारी मुठभेड़ में क्यों झोंक दिया’

| उत्तर प्रदेश | 0 Comments
About The Author
-