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सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें व्हॉट्सऐप की ‘इंड टू इंड एन्क्रिप्शन’ सर्विस को देश के लिए खतरा बताया गया था और इस आधार पर इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप व्हॉट्सऐप पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी।

पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता इस सिलसिले में सरकार या किसी दूरसंचार न्यायाधिकरण से संपर्क कर सकता है।

गौरतलब है कि हरियाणा के एक आरटीआई कार्यकर्ता सुधीर यादव द्वारा दायर याचिका में कहा गया था कि व्हॉट्सऐप ने अप्रैल से हर संदेश के लिए अपनी 256 बिट एन्क्रिप्शन सर्विस शुरू की है जिसको तोड़ा नहीं जा सकता है। व्हॉट्सऐप की इंड टू इंड एन्क्रिप्‍शन सर्विस आतंकवादियों को एक ऐसा कम्युनिकेशन टूल देती है जिसको रोकना असंभव है।

इसके अलावा याचिका में कहा गया था कि अन्य संदेश प्लेटफार्म जैसे हाइक, वाइबर और अन्य दूसरे मैसेजिंग ऐप उच्च एन्क्रिप्शन सेवा का इस्तेमाल कर रहे हैं और यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है।

व्हॉट्सऐप की इस सर्विस के जरिए भेजे गए सभी मैसेज पूरी तरह एन्क्रिप्टेड ‌होंगे। इसका मतलब यह है कि जब आप कोई मैसेज भेजेंगे तो इसको केवल एक ही व्यक्ति या ग्रुप चैट का मैंबर ही पढ़ सकता है।

कंपनी के कहना है कि कोई भी बाहरी इस मैसेज के अंदर ताक-झांक नहीं कर सकता है। न ही साइबर अपराधी। न ही हैकर्स। न ही शासन, यहां ताकि न ही हम।

लेटेस्ट व्हॉट्सऐप का इस्तेमाल करने वाले हर कॉल, मैसेज, फोटो, वीडियो, फाइल और वॉयस मैसेज जो भी आप भेजते हैं वो पूरी तरह से एन्क्रिप्टेड हो चुका है। इसमें ग्रुप चैट भी शामिल है।

व्हॉट्सऐप पर प्रतिबंध की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का आया फैसला

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