लोकायुक्त अदालत ने दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को विज्ञापन घोटाले में निर्दोष करार देते हुए उनके खिलाफ चल रही जांच को बंद कर दिया है। शीला दीक्षित पर सरकारी विज्ञापन जारी करने में नियमों की अनदेखी कर निजी कंपनी को लाभ पहुंचाने और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगा था।

लोकायुक्त जस्टिस रेवा खेत्रपाल ने केंद्रीय राजस्व महालेखाकार (एजीसीआर) की रिपोर्ट और इस मामले में लोकायुक्त की मदद के लिए नियुक्त अधिवक्ता की रिपोर्ट के आधार पर यह फैसला दिया है।

लोकायुक्त ने कहा है कि एक तरफ जहां अब तक पेश दस्तावेजों से आरोप साबित नहीं हो रहे हैं, वहीं मामले में शिकायतकर्ता कई बार आग्रह के बाद भी साक्ष्य पेश करने के लिए सामने नहीं आ रहे हैं। मालूम हो कि वर्ष 2012 में दिल्ली तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के खिलाफ अशोक कुमार नाम के शख्स ने लोकायुक्त में एक शिकायत की थी।

शिकायत में डीएवीपी के पैनल में नहीं होने के बावजूद मेसर्स वेद पहुजा एंड एसोसिएट्स को नियुक्त करने और दरों को लेकर मोलभाव नहीं करने का आरोप लगाया था। इतना ही नहीं दीक्षित ने 15 फीसद का कमीशन भी नहीं लिया, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ।

विज्ञापन घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित बेगुनाह

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