सपा सरकार के विधायकों, मंत्रियों तथा लालबत्ती धारी अन्य लोगों की मनमानियां किसी से छिपी नहीं हैं। अब नया मामला मेरठ के लालबत्ती धारी व योजना आयोग के सदस्य आकिल मुर्तजा का सामने आया है। वह दो साल से नगर निगम में ठेकेदारी कर रहे हैं। उनका ही प्रभाव है कि हाल ही में लॉटरी में उनकी कंपनी के नाम निर्माण कार्यो के 18 ठेके आवंटित हुए हैं। अब सवाल यह उठता है कि इस कंपनी ने यदि कार्यो में धांधली की तो उसे कौन रोकेगा, कौन जांच करेगा और कौन कार्रवाई करेगा?

भारत सरकार के जनप्रतिनिधित्व अधिनियम तथा केंद्र सरकार की स्पेशल गाइड लाइन के मुताबिक, कोई भी जनप्रतिनिधि (पार्षद, चेयरमैन, महापौर, विधायक, सांसद, मंत्री, राज्यमंत्री व सरकार से मिले लालबत्ती वाले पदों पर आसीन) किसी भी सरकारी विभाग में ठेकेदारी अथवा लाभ का कोई कार्य नहीं कर सकता है।

शास्त्रीनगर के रहने वाले उप्र योजना आयोग के सदस्य आकिल मुर्तजा दो साल से नगर निगम में ठेकेदारी कर रहे हैं। निर्माण कार्यो के लिए पंजीकृत फेडरल कंस्ट्रक्शन कंपनी के वह मालिक हैं। अब सरकार के प्रतिनिधि यदि ठेका चाहें तो वह उन्हें कैसे नहीं मिलेगा। निगम में अधिकतर टेंडरों में समान दरें मिलने पर टेंडर का आवंटन लॉटरी से किया गया, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से 18 कार्यो के टेंडरों की लॉटरी में उनकी कंपनी की पर्ची निकली। अब अगर इनकी कंपनी मानकों की अनदेखी करे तो निगम का कौन अधिकारी उसे रोकेगा।

लालबत्ती धारी कर रहे नगर निगम में ठेकेदारी

| उत्तर प्रदेश | 0 Comments
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