lucknow-metro_1466406478

ट्रांसपोर्टनगर से 8.5 किमी. एलीवेटिड रूट पर चलने के बाद लखनऊ मेट्रो इससे आगे जमीन के 13 मीटर नीचे चलेगी। हुसैनगंज से केडी सिंह बाबू स्टेडियम तक बनने वाली मेट्रो की भूमिगत सुरंग को जमीन की सतह से 13 मीटर नीचे बनाया जाएगा।

वहीं इस रूट पर बनने वाले तीन भूमिगत स्टेशन की गहराई 17 मीटर होगी। मेट्रो के संचालन के लिए भूमिगत रूट बना रही तुर्की की कंपनी इसी गहराई पर काम करेगी। भूमिगत रूट (टनल) पर जुलाई के अंतिम हफ्ते में काम शुरू कराने के लिए एलएमआरसी ने भी अपनी सहमति दे दी है।

टनल के तकनीकी सर्वे के बाद तय हुआ है कि मेट्रो रूट को यहां 13 मीटर गहराई में रखा जाए। स्टेशन बनाने के लिए जरूर गहराई को बढ़ाया जाएगा। इस गहराई को तय करने से पहले कंपनियों ने पिछले कई सालों के भूगर्भजल के स्तर का आकलन भी कर लिया है।

ऐसे में 13 मीटर की गहराई पर बनने वाली मेट्रो सुरंग और बाद में मेट्रो के संचालन के समय कोई दिक्कत नहीं आएगी। इतना ही नहीं इस गहराई पर टनल बनाने से कोई यूटिलिटी भी प्रभावित नहीं होगी।

इसकी वजह तेल की पाइपलाइन से लेकर सीवरेज और वाटर लाइन तक की गहराई यहां आठ मीटर से अधिक नहीं मिली है। लखनऊ मेट्रो केएमडी कुमार केशव का कहना है कि 13 मीटर की गहराई में मेट्रो का संचालन पूरी तरह सुरक्षित होगा।

निर्माण शुरू करने से पहले बिल्डिंग सर्वे और मिट्टी की जांच का काम कंपनी पहले ही शुरू कर चुकी है। प्रस्तावित रूट से 50-50 मीटर दोनों तरफ भवनों का सर्वे कराया जा रहा है।

लखनऊ मेट्रो की 3.44 किमी में भूमिगत सुरंग के काम में 1190.52 करोड़ रुपये का खर्च होना है। जुलाई से काम शुरू कर तुर्की की कंपनी गुलेनमैक और टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड तीन साल में काम पूरा करेंगीं।

यह काम जर्मन तकनीक की टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) से पूरा किया जाएगा। भूमिगत काम की वजह से यह निर्माण धीमी गति से होगा। इसकी वजह खोदाई के साथ ही टनल में लगने वाले छल्लों की कास्टिंग का काम लखनऊ में ही किया जाना भी है।

इन छल्लों को बनाने के लिए एक कास्टिंग यार्ड भी एलएमआरसी बनाएगा। मेट्रो के एक अधिकारी ने बताया कि चारबाग से मेट्रो के आगे बढ़ने पर एक सब-वे टनल के लिए बनेगा। इसके बाद टीबीएम मशीन को टनल में उतारा जाएगा। पहले से तय गहराई में टीबीएम मशीन खुदाई करेगी।

खुदाई होने के बाद पहले से कास्ट किए गए छल्लों को मिट्टी की सतह पर लगा दिया जाएगा। इस तरह कट एंड कवर तकनीक से पूरी टनल का काम किया जाएगा। यही पूरी दुनिया में उपयोग होने वाली इंजीनियरिंग है। यह सुरंग लखनऊ मेट्रो के फेज-1 का हिस्सा होगी।

मेट्रो अधिकारियों के मुताबिक भूमिगत रूट को आगजनी जैसी घटनाओं से बचाव के लिए सुरक्षित बनाया जाएगा। वहीं इस सुरंग में आग लगने पर धुआं भरने पर यात्रियों का दम घुटने से बचाने के लिए भी व्यवस्था होगी। इससे बचने को टनल वेंटीलेशन पर काम किया जाएगा। टनल में कमरे के साइज के पंखे लगे होंगे।

हर स्टेशन पर ऐसे दो पंखे लगाए जाएंगे। इनका काम धुआं को बाहर फेंकने और साफ हवा को अंदर छोड़ने का होगा। मेट्रो में आग लगने पर यात्रियों को वहीं उतार दिया जाएगा। मेट्रो नजदीकी स्टेशन की तरफ चली जाएगी।

यात्रियों को दूसरी तरफ सुरक्षित जगह पर ले जाया जाएगा। यात्रियों की तरफ धुआं न जाए, यह पंखों की मदद से सुनिश्चित होगा। वहीं दूसरी तरफ के पंखे साफ हवा को अंदर फेंकते रहेंगे। यह पूरी तरह पर्यावरण नियंत्रण प्रणाली है।

हां वेंटीलेशन से लेकर 24 घंटे पॉवर बैकअप की सुविधा रहेगी। पावर सप्लाई की जरूरत को पूरा करने के लिए यहां बाकी स्टेशनों पर 160 केवीए की जगह 1,000 केवीए केजनरेटर लगाए जाएंगे।

एमडी कुमार केशव का कहना है कि तीन साल में मेट्रो की टनल का निर्माण पूरा हो जाएगा। इसके बाद हम इस टनल से मेट्रो का संचालन शुरू कर पाएंगे।

यह संचालन केडी सिंह बाबू स्टेडियम से आगे मुंशीपुलिया के रूट केतैयार होने पर भी निर्भर करेगा। अगस्त से केडी सिंह बाबू स्टेडियम से आगे एलीवेटिड रूट पर भी काम शुरू एलएमआरसी को कराना है। यहां आठ स्टेशन बनाए जाने हैं।

लखनऊ मेट्रो की सुरंग बनाने का काम अगले महीने से शुरू हो जाएगा

| उत्तर प्रदेश, लखनऊ | 0 Comments
About The Author
-