अन्नाद्रमुक नेता जे जयललिता के निधन के बाद से तमिलनाडु की राजनीति पर गहराए संकट के बादल छंटने का नाम नहीं ले रहे हैं। पन्नीर सेल्वम और शशिकला के बीच उत्तराधिकारी की जंग अभी खत्म भी नहीं हुई है कि भ्रष्टाचार के मामले में सर्वोच्च न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला आ गया है। प्रदेश का सियासी संकट बेशक अन्नाद्रमुक की अपनी आंतरिक वजह से है। मगर सूबे के वर्तमान राजनीतिक हालात के लिए भाजपा और उसकी केंद्र सरकार की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

‘लंबा चलेगा तमिलनाडु का सियासी दंगल’

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