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विभूति खंड पुलिस ने बृहस्पतिवार रात हैनीमैन चौराहे के पास घेराबंदी करके क्राइम ब्रांच के नकली एएसपी मोहम्मद आरिफ को गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक का फर्जी परिचयपत्र बरामद हुआ।

हत्थे चढ़े जालसाज ने कुबूला कि एएसपी का आईकार्ड दिखाकर टोल टैक्स बचाता और व्यापारियों को अर्दब में लेकर बिल में छूट कराता था। उसने बताया कि उसके पिता के रेस्टोरेंट में पुलिसवाले भी बिल में अक्सर छूट करवाते थे।

एसओ विभूति खंड सत्येंद्र कुमार राय ने बताया कि सटीक सूचना पर बृहस्पतिवार रात एसएसआई अभिषेक तिवारी, कांस्टेबल उत्तम वाजपेयी व जगदंबा चौधरी की मदद से हैनीमैन चौराहे पर घेराबंदी करके हसनगंज थाने के ब्रह्मनगर निवासी मोहम्मद आरिफ को गिरफ्तार किया।

आरोपी से मिले फर्जी परिचयपत्र पर मो. आरिफ का नाम व पता था और पुलिस की वर्दी में उसका फोटो चस्पा था। आईकार्ड जारी करने वाले अधिकारी के स्थान पर एसएसपी की फर्जी मोहर व हस्ताक्षर थे। पूछताछ में कुबूला कि हसनगंज के बाबूगंज निवासी अपने दोस्त उबैद से फर्जी आईकार्ड तैयार कराया था।

मो. आरिफ अपनी पत्नी व दो बच्चों के साथ तीन सितंबर को मुंबई गया था, जहां नौ सितंबर तक बिसमिल्लाह होटल में ठहरा।

खुद को क्राइम ब्रांच का एएसपी बताया और आईडी के रूप में एएसपी के फर्जी परिचयपत्र की फोटोकॉपी जमा की। इस दौरान होटल प्रबंधन व मालिक से दोस्ती बनाई। अर्दब में आए होटल मालिक ने 18 हजार रुपये के बिल में छह हजार की छूट कर दी।

होटल मालिक ने अपने भतीजे का लखनऊ में संचालित आईएएस की एक कोचिंग में दाखिला कराने की पेशकश की और आरिफ ने उसे कोचिंग में दाखिले के साथ फीस में भी रियायत का झांसा दे दिया। कुछ दिनों पहले होटल मालिक अपने भतीजे को लेकर लखनऊ पहुंचा।

आरिफ के मोबाइल पर कॉल की। टालमटोल पर होटल मालिक अपने भतीजे की दाखिले की सिफारिश के सिलसिले में एटीएस में तैनात अपने परिचित अधिकारी के पास जा पहुंचा। उस अफसर से आरिफ के बारे में तहकीकात की। पता चला कि मो. आरिफ नाम का अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजधानी में तैनात ही नहीं है।

सूत्रों के मुताबिक, होटल मालिक ने मैनेजर को कॉल करके मो. आरिफ द्वारा जमा की गई आईडी का फोटो वॉटसएप पर मंगाया। उस पर मो. आरिफ का नाम ही नहीं पता भी सही था।

ऑफिस व आवास के फोन नंबर और जारीकर्ता के हस्ताक्षर व मुहर फर्जी थी। एटीएस के अफसर ने आरिफ को कॉल की तो उसने खुद को दिल्ली में बताया। होटल मालिक द्वारा केस करने से इन्कार पर एटीएस के अधिकारी ने एसओ विभूति खंड को मामले की जानकारी देने के साथ जालसाज को पकड़ने के निर्देश दिए थे।

मो. आरिफ ने पुलिस के बताया कि उसके पिता मेराज अहमद का डालीगंज में रेस्टोरेंट था। पुलिस वाले अक्सर बिल में छूट कराते थे। बीए के बाद उसने लखनऊ के साथ दिल्ली व मुंबई के बड़े होटलों में नौकरी पाने की कोशिश की।

नाकाम रहने पर छुटपुट काम करके घर का खर्च चलाने लगा। आठ महीने पहले उबैद की मदद से फर्जी आईकार्ड तैयार कराया था और सितंबर में पत्नी व बच्चों के साथ मुंबई की सैर की।

वहां होटल व दुकानों पर खरीदारी के दौरान छूट कराई। इसके अलावा विभिन्न स्थानों की सैर के दौरान टोल टैक्स नहीं दिया। टीटीई को अर्दब में लेकर रेल में बगैर टिकट यात्रा करता था।

मो. आरिफ ने कुबूला कि उसने उबैद के साथ पुलिस लाइन के गेट पर स्थित दुकान पर जाकर वर्दी का कपड़ा, कैप, बैज आदि के साथ खाली परिचयपत्र खरीदा। अपने नाप की वर्दी सिलाई।

बैज लगाकर वर्दी पहनी और कैप लगाकर फोटो खिंचाई। उबैद ने एसएसपी फर्जी मुहर की व्यवस्था की और एसएसपी के जाली दस्तखत से परिचयपत्र तैयार कर दिया।

रौब जमाते देख खुद बन गया नकली एएसपी

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