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मायानगरी मुंबई में फटका गैंग का कहर इस कदर हावी हो गया है कि अब पुलिस को गंभीरता से रणनीतियां बनानी पड़ रही हैं। ये एक नहीं कई गैंग हैं। ये गैंग लोकल ट्रेन से सफर करने वाले लोगों को अपना शिकार बनाता है। गैंग के निशाने पर उनके मोबाइल फोन होते हैं। अमूमन लोगों के हाथ में महंगे स्मार्टफोन होते, जिनपर गैंग के सदस्यों की नजर रहती है। ये बड़े ही शातिराना अंदाज से मोबाइल लूट की वारदात को अंजाम देते हैं। रोजाना मोबाइल लूट की शिकायतों ने जब रेलवे पुलिस की नींद उड़ाई तो ‘फटका गैंग’ भी कुख्यात गिरोहों में शामिल हो गए।

बड़ी ही आम है फोन लूटने की शैली, लेकिन अंदाज बेहद शातिराना

फटका गैंग के बदमाशों की वारदातों को अंजाम देने की शैली बड़ी ही आम लगती है लेकिन है अंदाज बेहद शातिराना होता है। गैंग के सदस्य अमूमन तब वारदातों को अंजाम देते हैं जब ट्रेन धीमी रफ्तार पर होती है। या फिर ट्रेन किसी मोड़ पर ट्रैक की अदला-बदली कर रही होती है या स्टेशन के पहुंचने के करीब होती है। ट्रेन जैसे ही धीमी गति पकड़ती है, इस गैंग के सदस्यों की गिद्ध निगाहें डिब्बे में दरवाजे के पास खड़े होकर सफर कर रगे लोगों के कीमती मोबाइलों को स्कैन करना शुरू कर देती है।

बदमाश ट्रैक के पास जगह-जगह लगे खंभों पर चढ़ जाते हैं। ट्रेन जैसे ही और स्लो होती है, ये बदमाश हाथ में लिए एक फटके (लकड़ी की डंडा नुमा चीज) को बढ़ाते हैं और दरवाजे पर खड़े और लटके लोगों के मोबाइल को फटके से झटक देते हैं। मोबाइल नीचे ट्रैक के पास गिरता है। बदमाश फुर्ती से गिरे हुए मोबाइल पर झपटते हैं और फुर्र हो जाते हैं। चौकाने वाली बात ये है कि ये सब मोबाइल मालिक के देखते हुए होता है और उसके पास सिवाय अपना फोन लुटते हुए देखने के कोई चारा नहीं होता है। बाद में आखिरी उपाय यही बचता है कि स्टेशन पर ट्रेन रुकने के बाद जीआरीपी या आरपीएफ से मामले की शिकायत की जाए।

पुलिस के आंकड़ों में बीते साल 60 मामले सेंट्रल लाइन के दर्ज हुए बताए जाते हैं, जबकि 42 मामले वेस्टर्न लाइन के हैं। लेकिन चश्मदीदों की मानें तो इससे भी ज्यादा वारदातें तो रोजाना ही हो जाती हैं।

मुंबई मिरर की खबर के मुताबिक अब जीआरपी और आरपीएफ ने फटका गैंग को नेस्तनाबूत करने के लिए कमर कस ली है। उन जगहों की लिस्ट बना ली गई हैं, जहां ये गैंग सक्रिय रहते हैं। करीब 20 से 22 स्टेशनों पर पुलिस ने सादा वर्दी में अपने आदमी लगा दिए हैं जो बदमाशों को देखते ही दबोचने का काम करेंगे। मुंबई के कुछ एक स्टेशनों को छोड़ दें तो तकरीबन हर स्टेशन पर मोबाइल लूटों की वारदातों की शिकायतें मिल चुकी हैं।

पुलिस के साथ-साथ सफर करने वालों और आम जनों को भी एक जुट होना चाहिए, ताकि गैंग की कारगुजारियों पर लगाम लगाई जा सके और इस तरह के गिरोहों को फिर से न पनपने दिया जाए।

 

 

रेलवे के लिए सिरदर्द बनी ‘फटका गैंग’, पुलिस ने कसी कमर

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