भोपाल। राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट से प्रदेश में सशर्त पदोन्नति बहाल करने की गुहार लगाएगी। 24 जनवरी से मामले की सुनवाई शुरू हो रही है। पहले दिन की सुनवाई में सरकार के वकील कर्मचारियों से जुड़े तथ्यों के साथ कोर्ट के सामने यह बात भी रखेंगे। सरकार का तर्क है कि ऐसा करने से कर्मचारियों को रिटायर होने से पहले वाजिब हक मिल जाएगा, जिससे उनका गुस्सा भी कम होगा।

पदोन्नति में आरक्षण मामले में राज्य सरकार लगातार घिरती जा रही है। मामला जितना खिंच रहा है, कर्मचारियों का गुस्सा उतना ही बढ़ता जा रहा है। इसे देखते हुए सरकार को विकल्प तलाशना पड़ रहा है। सपाक्स, अजाक्स और सरकार भी तैयारी में जुटी है।

हालांकि इस बार सरकार का उद्देश्य तात्कालिक व्यवस्था बनाना है। उल्लेखनीय है कि जबलपुर हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर पहली सुनवाई में ही सुप्रीम कोर्ट ने स्टेटस को (यथास्थिति) कह दिया था। इसके बाद से प्रदेश में पदोन्नति पर रोक लगी है।

कुछ राज्यों में अभी भी पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था लागू है, इसलिए फैसले में समय लग सकता है। हम सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध कर रहे हैं कि पुरानी व्यवस्था फिलहाल बहाल कर दी जाए। फैसला जैसा आएगा, बाद में वैसा तय कर लेंगे। पुरुषेंद्र कौरव, अतिरिक्त महाधिवक्ता

राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट से प्रदेश में पदोन्नति बहाल करने की गुहार लगाएगी

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