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नई दिल्ली। राजस्थान में दलित छात्रा डेल्टा मेघवाल की शिक्षण संस्थान में हत्या कर दी गई। इस मामले में प्रशासन चुप रहा, मीडिया भी मौन साधे रही क्या फर्क पड़ता है किसी को, आखिर दलित की ही तो बेटी थी। इस घटना ने राजस्थान प्रशासन की ढील और अपराधियों को मिली छूट का पर्दाफाश कर दिया। इस मुद्दे को खोजते-खोजते राजस्थान के अन्य शिक्षण संस्थानों से सन्न कर देने वाले मामले सामने आए।
ऐसा लगता है कि राजस्थान में शिक्षण संस्थाओं को शिक्षक ही जबरन यौन उत्पीड़न के अड्डों में तब्दील कर देना चाहते है. सबसे शर्मनाक बात यह है कि शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाले इन स्थलों पर घिनौनी हरकतें करने वाले हवस के पुजारियों को राज्य शासन का पूरा समर्थन प्राप्त है.
मार्च 2016 में पाली जिले के सोजत में 4 मासूम दलित लड़कियों के साथ छैलसिंह चारण नामक शिक्षक ने छेड़छाड़ की, प्रलोभन ओर धमकी के जरिये जबरन सम्बन्ध बनाने की कोशिश की, उनके सीने को छुआ और इस हरकत के बारे में किसी को बताने पर जान से मार डालने की धमकी तक दी. मामले का पता चलने पर पुलिस में मामला दर्ज करवाने वाली कस्तूरबा गाँधी विद्यालय की प्रधानाध्यापिका के घर पर दो बार जानलेवा हमला किया गया. अजा/अजजा अत्याचार निवारण संशोधन विधेयक एवं पोस्को तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 376 ( घ ) के तहत मामला दर्ज हुआ.
न्याय देने के बजाय इन पीड़ित नाबालिग दलित लड़कियों तथा उनके परिजनों को धमकाने और बयान बदलवाने का अंतहीन सिलसिला चला. आरोपी इतने रसूख वाले निकले कि जाँच अधिकारी बदलवाकर अन्य जिले में तैनात “अपनी जात ” के पुलिसिये को कार्यवाही दिला दी, ताकि दोषी को बचाया जा सके.

 

मार्च के अंत में बीकानेर जिले के नोखा के श्री जैन आदर्श शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय में एक अत्यंत प्रतिभावान दलित किशोरी का वहीँ के शारीरिक शिक्षक विजेन्द्रसिंह ने बलात्कार किया और बाद में उसे मार कर पानी के कुंड में डाल दिया. पूरे प्रदेश और देश तथा यहाँ तक कि विदेशों तक मामला उठा. सीबीआई जाँच की मांग की गयी, मगर आज तक सीबीआई जाँच तो दूर जाँच के लिए नोटिफिकेशन तक जारी नहीं किया गया.

 

हाल ही में भीलवाड़ा जिले की राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जीवलिया के एक नाबालिग आदिवासी भील बच्चे के साथ उसी स्कूल के प्रधानाध्यापक श्यामलाल ओझा ने अश्लील हरकत की. मामले का वीडियो वायरल हो जाने के बाद ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया, लिखित शिकायत की गई, मगर सिर्फ प्रधानाध्यापक को एपीओ करके कर्तव्य की इतिश्री कर ली गई. जबकि मामला पोस्को जैसे गंभीर कानून से जुड़ा हुआ है.

 

खबर आ रही है एक और शैक्षणिक संस्थान में दलित छात्राओं के साथ दुष्कर्म का मामला सोशल मीडिया पर छाया हुआ है, जिसे दबाने की कोशिश चल रही है. प्रदेश की माननीय महिला मुख्यमंत्री महोदया यह हो क्या रहा है ? शिक्षा के इन मंदिरों में प्रदेश की बेटियां क्यों सुरक्षित नहीं है ?

 

आखिर सोजत की उन मासूम नाबालिग दलित छात्राओं को न्याय कब मिलेगा ? मिलेगा भी या नहीं ? या उन्हें भी डेल्टा की तरह झूठा और चरित्रहीन साबित करके कलंकित करने का कारनामा किया जायेगा.
मैडम वसु, वैसे तो आपसे अब कोई उम्मीद बची ही नहीं है क्योंकि आपके मुख्यमंत्री रहते राजस्थान के दलितों को न्याय मिलेगा. यह संभव ही नहीं लगता है.

 
IIT ग्रेजुएट, मानवाधिकार कार्यकर्ता स्वतंत्र पत्रकार सुरेश जोगेश ने इस मामले में लिखा है…..
4 नन्ही सी पीड़ित बेटियां, 1 बेबस लेकिन प्रयासरत शिक्षिका, सहमे अभिभाभावक, अफसरों की आज्ञा तले दबी स्थानीय पुलिस और 5 महीने से आतंक मचाये रसूखदार अपराधी

 

राजस्थान में पुनः एक 13 वर्षीय मासूम दलित के साथ वही किये जाने की कोशिश हो रही है जो डेल्टा मेघवाल के साथ हुआ. पाली (राजस्थान) की यह घटना 14 व 16 मार्च की है. दो बार लगातार 12-14 साल की 4 मासूम लड़कियों के साथ सरकारी स्कूल में शारीरिक छेड़छाड़, पैसे देकर सम्बन्ध बनाने की कोशिश, धमकाकर सम्बन्ध बनाने की कोशिश, और आखिर सफल न होने पर धमकाकर चुप करवाने की निरंतर कोशिश.
पाली (राजस्थान) के सोजत शहर में बने आवासीय कस्तूरबा गांधी विद्यालय में sc/st की तक़रीबन 100 बालिकाएं रहती हैं. सभी छोटी कक्षाओं की.
8 वीं बोर्ड की परीक्षा के लिए केंद्र सरकारी सीनियर सेकेंडरी विद्यालय में रखा गया. 14 मार्च को अध्यापक छैलसिंह ने पहली बार छेड़छाड़ की जिसका विरोध डर के मारे लड़कियां नहीं कर पाई.
वही 12-14 की लड़कियां वापस जब 16 को अगले पेपर देने गयीं तब तक उसके होंसले बढ़ चुके थे. इस बार ज्यादा हुआ. एक-एक करके किसी के सीने पर हाथ डाला तो किसी के जांघ पर. एक को परीक्षा के बाद बुरी नियत के चलते रोक दिया गया जिसे अन्य शिक्षक ने देखा तो वहां से रवाना किया. डरी सहमी लड़कियों ने आखिर कुछ हिम्मत की और इसकी जानकारी आवासीय विद्यालय की शिक्षिका व घरवालों को दी.
SC/ST एक्ट लगा और पोस्को एक्ट भी. पर उल्टा हुआ. तबसे आतंक के साए में हैं लड़कियां, घरवाले और शिक्षिका. पहले छेड़छाड़, फिर धमकियाँ. SC/ST व पोस्को एक्ट के तहत मामला दर्ज होने के बावजूद न कार्यवाही हो पाई न ही मीडिया अपना फर्ज निभा रहा. सही समय पर ध्यान देकर फिर एक बेटी की जिंदगी बर्बाद होने से बचायी जा सकती है.
रोज उन्हें धमकाया और डराया जाता है. कभी राह चलते घेरकर तो कभी घर पर पत्थर फेंककर. उनके घर तक पहुँच जाते हैं रोज अपराधी धमकाने. कभी थाने के अंदर तो कभी न्यायलय तक. कभी उन लड़कियों को उठाने की धमकी तो कभी शिक्षिका का बच्चा गायब करने की धमकी. शिक्षिका के घर जानलेवा हमला तक कर दिया.
इतना डर, इतना आतंक कि कुछ ने बयान बदल दिए मुख्य पीड़िता को छोड़, कुछ ने सामाजिक लोकलाज के चलते. कुछ अधिकारी बदले गए क्योंकि उन्होंने अन्याय का साथ नहीं दिया. यहाँ तक कि जांच को प्रभावित करने के लिए दूसरे जिले (सिरोही) के अपनी जाति के डिप्टी को जाँच के लिए लगवाया. मुख्य पीड़िता व उसका मजदूर पिता अब तक जुटे हैं, पर न्याय भी बहुत दूर हो. मामला डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में है. न मीडिया का साथ है न सामाजिक संगठनों तक बात पहुंची है. आरोपी गिरफ्त से बाहर है पर उसका आतंक साफ़ दिखाई दिया जिनसे भी इस बारे में बात की गयी.

 

 

राजस्थान के स्कूल, या यौन उत्पीड़न के अड्डे

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