गाजियाबाद। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 15 जिलों की 73 सीटों पर 11 फरवरी यानी कल मतदान होने जा रहा है। मुस्लिम और जाट बहुत इस इलाके कई ऐसे नेता हैं, जिनकी साख दांव पर लगी है। ये नेता तकरीबन सभी पार्टियों के हैं। इन सभी का मकसद चुनाव में पार्टी को इस इलाके से जीत दिलाकर अपनी साख को बढ़ाना है।

जातीय गणित, वोटबैंक और सियासी दमखम के नजरिये से देखें तो पश्चिमी यूपी की पांच हस्तियों का असर इस क्षेत्र में सबसे ज्‍यादा है और इस चरण में इन्‍हीं की सियासी प्रतिष्‍ठा दांव पर हैं।

देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के पुत्र व राष्ट्रीय लोकदल के मुखिया अजित सिंह को पश्चिमी यूपी का कद्दावर नेता माना जाता है। रालोद नेता अजित सिंह गन्‍ना बेल्‍ट’ के नाम से मशहूर इस क्षेत्र की जाट बहुल सीटों पर खासा प्रभाव है। हालांकि, 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी को झटका जरूर लगा था, लेकिन अब हालात बदले नजर आ रहे हैं।

2012 विधानसभा चुनाव में 46 उम्‍मीदवारों को खड़ा किया था और पार्टी ने नौ सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं, 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के बाद परंपरागत जाट-मुस्लिम वोटबैंक दरक गया था। यही वजह थी कि 2014 के लोकसभा चुनावों में पार्टी का खाता तक नहीं खुला था, लेकिन इस बार फिर से अपने खोए सियासी रसूख को वापस पाने की कोशिशों में हैं। इस बार रालोद की रैलियों में भीड़ भी खूब जुट रही है।

भाजपा के विवादित नेता हुकुम सिंह

भारतीय जनता पार्टी से कैराना लोकसभा सीट से सांसद हुकुम सिंह गुर्जर समाज से आते हैं। ऐसे में गुर्जरों में उनका खासा प्रभाव है। पिछले साल ही कैराना से हिंदुओं के पलायन का मुद्दा प्रमुखता से उठाने वाले हुकुम सिंह ने अबकी बार बेटी मृगांका सिंह को चुनावी मैदान में उतारा है। इसके चलते विरोध में भतीजा रालोद के टिकट पर इसी सीट से चुनावी मैदान में है। बावजूद इसके हुकुम सिंह का कद और प्रभाव ज्यादा है।

केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान

भारतीय जनता पार्टी से मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से सांसद संजीव बालियान भी अपने विवादित बयानों के लिए जाने जाते हैं। फिलहाल केंद्रीय जल संसाधन राज्‍य मंत्री हैं। इन पर मुजफ्फरनगर दंगों के बाद ध्रुवीकरण के आरोप लगे थे। इनका अपने क्षेत्र में प्रभाव है।

संगीत सोम

मेरठ की सरधना सीट से भाजपा के उम्‍मीदवार हैं। पिछली बार भी इसी सीट से जीते थे। मुजफ्फरनगर दंगों के बाद ध्रुवीकरण के आरोप लगे हैं।

नरेश टिकैत

भारतीय किसान यूनियन के दिवंगत नेता महेंद्र सिंह टिकैत के पुत्र हैं। किसानों में जबर्दस्‍त पैठ है। ये भी जाट मतदाताओं को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।

ये जिले जहां होना है चुनाव

मेरठ, बागपत, बुलंदशहर, गौतमबुद्धनगर, हापुड़, गाजियाबाद, शामली और मुजफ्फरनगर हैं। मेरठ-सहारनपुर मंडल के इन जिलों की आबादी के लिहाज से देखा जाए तो तीन जातियों का वर्चस्‍व है।

इस इलाके की सर्वाधिक आबादी मुस्लिमों की है जोकि कुल जनसंख्‍या का यहां 26 प्रतिशत हिस्‍सा है। 21 फीसद आबादी के हिसाब से दूसरा स्‍थान दलितों का है और 17 प्रतिशत के हिसाब से तीसरे स्‍थान पर जाट हैं।

पहले चरण में इन जिलों में होना है मतदान

पहले चरण में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, हापुड़, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, आगरा, फिरोजाबाद, एटा और कासगंज जिलों में मतदान होना है।

यह भी जानना जरूरी

इस चरण में 73 सीटों के लिए कुल 2.57 करोड़ लोगों को मताधिकार प्राप्त है जिनमें 1.17 करोड़ महिलाएं हैं। युवा वर्ग में 18 से 19 साल के बीच के मतदाताओं की संख्या भी 24 लाख से ऊपर है।

वर्ष 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में इस चरण की 73 में से भाजपा को केवल 11 सीटें मिली थीं। मगर दो साल बाद 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में इस पार्टी ने इस अंचल की सभी लोकसभा सीटों पर अपना परचम फहराया था। लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अपने सहयोगी अपना दल के साथ प्रदेश की 80 में से 73 सीटें जीती थी।

पिछले विधानसभा चुनाव में इस अंचल में सपा, बसपा ने 24-24 सीटें जीतकर शानदार कामयाबी हासिल की थी और अजित सिंह के राष्ट्रीय लोकदल को 9 तथा कांग्रेस को पांच सीट मिली थी।

भाजपा ने लोकसभा चुनाव में मिली कामयाबी को विधानसभा में भी दोहराने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के नेतृत्व में जोरदार प्रचार अभियान चलाया तथा सपा, बसपा और कांग्रेस पर जोरदार हमले किये।

यूपी में पहले चरण के लिए 73 सीटों पर चुनाव कल

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