mulayam-singh-yadav_1463916192

यूपी में बिहार फार्मूले की जमीन तैयार करने में  ही गैरभाजपाई दल बिखरे दिख रहे हैं। गठबंधन के नाम पर दल अपनी डपली अपना राग वाली राह पर चल निकले हैं। प्रमुख दल सपा, बसपा, कांग्रेस और रालोद अलग अलग चुनाव लड़ने की बात करने लगे हैं।

माना जा रहा है कि अगर सभी दल एकला चलो की रणनीति पर आगे बढ़े तब भाजपा की घेराबंदी उनके लिए  मुश्किल हो सकती है। बिहार फार्मूले को 2017 में यूपी में आजमाने की मंशा रखने वाले राजनीतिक दल अब एकला चलो की राह पर चलते दिख रहे हैं।

बिहार के सीएम नीतीश कुमार की पहल थी कि  यूपी में कांग्रेस, सपा, रालोद  और जेडीयू के साथ चुनाव लड़े। उनका मानना था कि बसपा का साथ मिल जाए तो सोने पर सुहागा रहेगा। इस दिशा में  प्रयास शुरू भी किए गए। शुरूआती दौर में ही जेडीयू और रालोद के एका की कोशिश की गई, लेकिन जेडीयू-रालोद की दोस्ती पहले पायदान पर यह नाकाम साबित रही। बसपा मुखिया मायावती भी काफी दिन पहले साफ कर चुकी हैं कि वह किसी दल के साथ चुनाव नहीं लड़ेगी।

बताया जा रहा है कि कांग्रेस की कोशिश रालोद और जेडीयू के बजाए बसपा से मिलकर लड़ने की रही है। लेकिन बसपा के रुख से उनकी रणनीति धरी रह गई। बृहस्पितवार को कांग्रेस के यूपी प्रभारी गुलाम नबी ने भी साफ कर दिया कि पार्टी विधानसभा चुनाव में किसी से गठबंधन नहीं करेगी।

राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव  के दौरान से  सपा और रालोद की दोस्ती की अटकलें भी फिलहाल थमती दिख रही हैं। रालोद के  प्रदेशाध्यक्ष मुन्ना सिंह चौहान ने भी  कह दिया कि पार्टी के युवा चेहरा  जयंत चौधरी को सीएम  के रूप में  पेश कर पार्टी अकेले चुनाव मैदान में उतरेगी।

सपा के प्रदेशाध्यक्ष और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी कई बार अपनी सभाओं में अपने दम पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं।

यूपी में अगर ऐसा हुआ तो भाजपा को बड़ी राहत देगी ये खबर!

| उत्तर प्रदेश | 0 Comments
About The Author
-