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लखनऊ. एक बार फि‍र से समाजवादी पार्टी में कौमी एकता दल के वि‍लय की सुगबुगाहट तेज हो गई है। शि‍वपाल यादव ने वि‍लय का मामला मुलायम सिंह यादव पर छोड़ दि‍या है। पूर्वांचल की कई सीटों पर है इस दल का प्रभाव

– मुख्‍तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल का गाजीपुर, मऊ, बलि‍या और वाराणसी की कुछ सीटों पर अपना प्रभाव है।
– इन सीटों पर मुस्‍लि‍म वर्ग की आबादी 20 से 22 फीसदी के आसपास है जो एकजुट होकर वोट करती है।
– 2012 के विधानसभा चुनाव में इसने यूपी की 12 जिलों के कुल 41 सीटों पर ताल ठोकी थी।
– इसमें हर सीट पर 10 हजार से लेकर कौमी एकता दल को 60-70 हजार वोट मि‍ले थे।
– वाराणसी की कुल 5 सीटों में से 4 पर इसने चुनाव लड़ा। सभी हार गए।
– इसके साथ ही सपा को भी सीट गंवानी पड़ी थी।
– लोकसभा चुनाव में कौमी एकता दल ने छोटी-छोटी क्षेत्रीय पार्टियों से गठबंधन कर एकता मंच के तहत चुनाव लड़ा था।
– इसमें बलि‍या सीट से 25 फीसदी वोट पाने के बाद भी मुख्‍तार के भाई चुनाव हार गए थे।
– गाजीपुर से डीपी यादव को करीब 68 हजार वोट मिले।
– गाजीपुर की 7 विधानसभा में 6 पर सपा का कब्जा है। 1 सीट पर कौमी एकता दल का कब्जा है।
– मऊ की 4 सीटों में से 3 पर सपा का कब्जा है। मऊ सदर सीट से मुख्‍तार अंसारी विधायक हैं।
– बलिया में कुल 7 सीटों में से 6 पर सपा का कब्जा है तो 1 पर बसपा का कब्जा है।

यूपी चुनाव 2017: जानिए सपा के लिए क्यों जरूरी है कौमी एकता दल

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