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दिल्ली पुलिस के पूर्व कमिश्नर बीएस बस्सी को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) का सदस्य बनाया गया है। मंगलवार को केंद्र सरकार ने इस संवैधानिक पद पर 60 वर्षीय बस्सी की नियुक्ति कर दी।अध्यक्ष सहित 11 सदस्यीय आयोग में इनका कार्यकाल पांच वर्षों के लिए होगा। वह फरवरी, 2021 में रिटायर होंगे। यूपीएससी देश में आईएएस, आईपीएसऔर आईएफएस समेत अन्य सेवा के अफसरों का चयन करने के लिए हर साल सिविल सेवा परीक्षा आयोजित करता है।

1977 बैच के आईपीएसअधिकारी भीम सेन बस्सी इस वर्ष फरवरी में ही दिल्ली के पुलिस कमिश्नर पद से सेवानिवृत्त हुए थे। संविधान के अनुसार यूपीएससी के सदस्य का कार्यकाल अधिकतम छह वर्ष अथवा 65 वर्ष की उम्र तक के लिए होता है। चूंकि इस वर्ष फरवरी में 60 वर्ष का होने पर बस्सी रिटायर हुए थे। इसलिए संघ लोक सेवा आयोग के सदस्य के रूप में उनका कार्यकाल पांच वर्ष बाद फरवरी, 2021 में पूरा हो जाएगा।

दिल्ली पुलिस आयुक्त के रूप में उनका कार्यकाल सुर्खियों में रहा। आम आदमी पार्टी सरकार से आए दिन टकराव और कार्यकाल के आखिरी महीनों में जेएनयू छात्र नेताओं की गिरफ्तारी को लेकर बस्सी का नाम लगातार चर्चा में रहा।

सदस्य के रूप में बस्सी की नियुक्ति के बाद यूपीएससी में 10 सदस्यों की निर्धारित संख्या अब पूरी हो गई है। इनके अलावा अल्का सिरोही, डेविड आर सिएमलाई, मनबीर सिंह, डीके देवन, विनय मित्तल, छतर सिंह, प्रो. हेमचंद्र, अरविंद सक्सेना और प्रो. प्रदीप कुमार जोशी भी आयोग के सदस्य हैं। दीपक गुप्ता यूपीएससी के अध्यक्ष हैं। आईएएस, आईपीएसऔर अन्य अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के अलावा विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को भी आयोग के सदस्य के रूप में चयनित किया जाता है।

सीबीआई के पूर्व निदेशक एपी सिंह भी यूपीएससी के सदस्य थे। लेकिन विवादित मांस कारोबारी मोइन कुरैशी के साथ नाम उछलने के बाद आईपीएससंवर्ग के सिंह ने जनवरी, 2015 में इस्तीफा दे दिया था।

 

यूपीएससी के सदस्य बनाए गए पूर्व कमिश्नर बीएस बस्सी

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