सपा की फूट का फायदा उठाने में जुटी BJP-BSP, यादव-मुस्लिम वोट को साधने की हो रही कोशिश

समाजवादी पार्टी में चल रहे उठापटक के बीच अब सवाल इस बात का उठ रहा है कि यादव और मुस्लिम वोट अब किस पाले में जाएंगे। इस बड़े वोट बैंक का लाभ पार्टी के अखिलेश गुट को मिलेगा या शिवपाल गुट को, या फिर मुस्लिम वोट बैंक को साधने में जुटी मायवती को। हालांकि अभी सब कुछ साफ नहीं है फिर भी इतना तो तय है कि सपा की फूट का लाभ उठाने में विपक्षी दल पीछे नहीं हटेंगे।

समाजवादी पार्टी में चल रही कलह के बाद उसके खाते के वोट बैंक को हथियाने के लिए भाजपा और बसपा एक्टिव हो गई है।  भाजपा की निगाह जहां पिछड़ा वोट बैंक के साथ यादव जाति के वोट बैंक को हथियाने की है। वहीं, मायावती मुस्लिम वोट बैंक को पर नजरें गड़ाए हुए हैं। बसपा की अबतक की गणित यही है कि दलित और मुस्लिम एकजुट होकर यदि उसके पक्ष में मतदान करते हैं, तो अन्य दलों को परेशानी उठानी पड़ सकती है।

राज्य में मुसलमानों की जनसंख्या 19 प्रतिशत के आसपास है। 70 विधानसभा क्षेत्रों में इनकी संख्या 20 फीसदी से अधिक है।
पश्चिमी यूपी की 20, पूर्वी यूपी की 10, मध्य यूपी की 05, तथ बुंदेलखण्ड की 1 सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 55 से 60 फीसदी है। मुसलमानों की सबसे अधिक संख्या पश्चिमी उत्तर प्रदेश में है।

जहां तक पिछड़ी जातियों की बात है तो इस जाति का सबसे बड़ा वोट बैंक यादवों का माना जाता है। मुलायम सिंह अपनी राजनीति के आरंभ से ही पिछड़ों पर भरोसा करते रहे हैं। यही कारण है कि मुस्लिमों के बाद पिछड़ी जातियों ने मुलायम को सत्ता के सिंघासन पर बैठाने का काम किया है। यूपी में पिछड़ी जातियों में अहीर, यादव, यदुवंशी, ग्वाला 19 प्रतिशत का वोट शेयर करते हैं।

यादव-मुस्लिम वोट को साधने की हो रही कोशिश

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